आंदोलन के नाम पर युवाओं को पिटवाने वाली CJP का सच का राया सामने | Sonam Wanghchuk | Abhijeet Dipke | Sach Ki Raftar
जंतर-मंतर पर क्रांति का झंडा लहराने और देश के युवाओं को बड़े-बड़े सपने दिखाने वाले चेहरों का सच अब खुद उनके ही बयानों से बाहर आ चुका है। जो युवा देश के शिक्षा तंत्र की खामियों, NEET पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों से जूझते हुए अपनी जान तक गंवाने को मजबूर थे, वे इस उम्मीद में आंदोलन से जुड़े कि कोई उनके हक के लिए लड़ रहा है। लेकिन सच्चाई इसके बिल्कुल उलट निकली।
सोशियो-पॉलिटिकल ड्रामा की पटकथा कुछ ऐसी रची गई थी कि आंदोलन का मकसद देश के युवाओं को इंसाफ दिलाना नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करना था।
सोनम वांगचुक के हालिया खुलासे से यह बात साफ हो गई है कि उनकी योजना 20 जुलाई को संसद मार्च के नाम पर आंदोलन वापस लेने और पूरे मुद्दे को विपक्ष की गोद में सौंपने की थी।
सोनम वांगचुक का यह मानना कि वे राहुल गांधी की मदद से संसद पर अपना अनशन तोड़ना चाहते थे, इस पूरे विरोध-प्रदर्शन की असलियत को बेनकाब करता है। जो नेता और कार्यकर्ता खुद को निष्पक्ष और जनता का प्रतिनिधि बता रहे थे, वे असल में राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल जैसे नेताओं के हाथों चाय-पानी पीकर और अनशन तुड़वाकर अपनी राजनीतिक गोटी लाल करना चाहते थे।
वे तो राहुल गांधी के पास जाने के लिए पूरी तरह तैयार बैठे थे, लेकिन वहां से तवज्जो न मिलने के कारण उनकी योजना धरी की धरी रह गई।
इस पूरे खेल में अगर किसी का नुकसान हुआ, तो वे थे देश के वे सीधे-सादे युवा, जिन्होंने इन नेताओं की बातों में आकर लाठियां खाईं और अपना समय बर्बाद किया।
वांगचुक के बयानों से ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) और इसके पर्दे के पीछे काम कर रहे रणनीतिकारों की लाचारी भी सामने आ गई है। वांगचुक ने खुद लिखा कि CJP का एक व्यक्ति रो रहा था और पूछ रहा था कि बिना बेइज्जत हुए इस विरोध-प्रदर्शन से बाहर कैसे निकला जाए। जंतर-मंतर पर न तो कोई भारी भीड़ थी और न ही आंदोलनकारियों में कोई हौसला बचा था। जो लोग खुद को जन-नायक बता रहे थे, वे मजबूरी में वहां टिके थे और वहां से भागने का रास्ता तलाश रहे थे।
इसी कड़ी में अभिजीत दीपके जैसे चेहरों का सच भी जनता के सामने है। जिन्होंने खुद यह स्वीकार किया था कि उन्होंने आम आदमी पार्टी इसलिए छोड़ी क्योंकि वहां पैसे कम मिलते थे। इससे यह साफ जाहिर होता है कि राष्ट्रभक्ति और जनसेवा की आड़ में केवल पैसों और निजी फायदों का कारोबार चल रहा था।
सोनम वांगचुक का यह कहना कि वे खुद इस बात की गारंटी नहीं दे सकते कि CJP के लोग भ्रष्ट नहीं होंगे, यह दर्शाता है कि उन्हें अपने ही सहयोगियों पर रत्ती भर भरोसा नहीं है। आज जब वांगचुक खुद अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को स्वीकार कर रहे हैं, तो यह बात स्पष्ट हो जाती है कि जंतर-मंतर पर रचा गया पूरा ड्रामा सिर्फ नेता बनने और सियासत में अपनी जगह तलाशने का एक जरिया था। देश के युवाओं के भविष्य, उनकी पीड़ा और संघर्षों से इन कथित आंदोलनकारियों का कोई लेना-देना नहीं था।
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