आतंक का सौदागर खुद अपने ही बुने जाल में फंसा: बलूचिस्तान ट्रेन धमाके ने खोली पाकिस्तान के दावों की पोल | Sach Ki Raftar
दुनिया के सामने खुद को एक “उभरती हुई अर्थव्यवस्था” और अमन-पसंद मुल्क साबित करने का ढोंग रचने वाले पाकिस्तान को एक बार फिर उसी के पालतू सांपों ने डस लिया है। 24 मई को बलूचिस्तान के क्वेटा में हुआ भीषण ट्रेन धमाका इस बात का जीता-जागता सबूत है कि जो मुल्क दुनिया भर में आतंकवाद का एक्सपोर्ट करता आया है, आज वह खुद अपनी ही सरजमीं पर लाचार और असुरक्षित खड़ा है।
क्वेटा से पेशावर जा रही जाफर एक्सप्रेस को क्वेटा शहर के भीतर ही चमन फाटक के पास निशाना बनाया गया। शुरुआती खबरों के मुताबिक, विस्फोटक से भरी एक कार को ट्रेन से टकरा दिया गया, जिसके बाद एक जोरदार धमाका हुआ। इस धमाके में ट्रेन की एक बोगी पूरी तरह जलकर राख हो गई और कई बोगियां पटरी से उतर गईं। इस आत्मघाती हमले में कम से कम 24 लोगों की मौत हो चुकी है और 50 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं।
मरने वालों में पाकिस्तानी सेना के जवान भी शामिल थे। इस वीभत्स हमले की जिम्मेदारी बलोच लिबरेशन आर्मी (BLA) के आत्मघाती दस्ते ‘मजीद ब्रिगेड’ ने ली है। बीएलए ने साफ कहा है कि उनका निशाना पाकिस्तानी सेना के जवान थे। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ सोशल मीडिया (X) पर निंदा के घिसे-पिटे बयान जारी कर रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि पाकिस्तान के भीतर आम नागरिकों और खुद उनकी सेना की जान की कोई कीमत नहीं रह गई है।
एक तरफ पाकिस्तान दुनिया भर के मंचों पर जाकर खुद को निवेश के लिए सुरक्षित और एक बड़ी आर्थिक ताकत के रूप में पेश करने की भीख मांगता है, तो दूसरी तरफ उसके अपने ही सूबों में सरेआम ट्रेनें उड़ाई जा रही हैं। जिस देश में देश की सेना और रेलवे जैसे बुनियादी ढांचे ही सुरक्षित नहीं हैं, वहां कोई विदेशी निवेशक अपने पैसे क्यों फंसाएगा? पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था वेंटिलेटर पर है, और ऐसे आंतरिक हालात उसे पूरी तरह दिवालियापन की ओर धकेल रहे हैं।
यह इतिहास गवाह है कि पाकिस्तान ने दशकों तक आतंकवाद को अपनी सरकारी नीति (State Policy) की तरह इस्तेमाल किया है। भारत और दुनिया के अन्य हिस्सों में अस्थिरता फैलाने के लिए उसने जिस ‘जिहाद’ और ‘फिदायीन’ संस्कृति को पाला-पोसा, आज वही भस्मासुर बनकर उसे ही निगल रहा है। पाकिस्तान ने हमेशा आतंकियों को ‘अच्छे आतंकी’ और ‘बुरे आतंकी’ के चश्मे से देखा। आज बलूचिस्तान में जो हो रहा है, वह पाकिस्तान की इसी दोहरी नीति का नतीजा है।
बीएलए जैसी संस्थाएं बार-बार ऐसे हमलो को अंजाम दे रहा है आपको याद होगा की 2024 में इसी ट्रेन को हाईजैक करने की कोशिश की गई थी और अब आत्मघाती हमला। बीएलए पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों की नाक के नीचे ऑपरेशन्स को अंजाम दे रही हैं, जो पाकिस्तानी सेना के तथाकथित “मजबूत होने” के गुब्बारे की हवा निकाल देता है। क्वेटा का यह धमाका केवल एक आतंकी हमला नहीं है, बल्कि यह पाकिस्तान के एक ‘विफल देश’ होने का सर्टिफिकेट है।
जो देश कश्मीर और दुनिया भर के मुद्दों पर ज्ञान बांटता फिरता है, वह अपने ही घर में लगी आग को बुझाने में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है। जब तक पाकिस्तान आतंकवाद की फैक्ट्री चलाना बंद नहीं करेगा, तब तक उसकी कौम इसी तरह असुरक्षित और बदहाल रहेगी।
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