कट्टर ईमानदार’ का सबसे गंदा चेहरा! जज को धमकी, बापू का अपमान बेपर्दा हुए केजरीवाल और सिसोदिया | Sach Ki Raftar
आज हम उस चेहरे से नकाब उतारेंगे जो खुद को देश का ‘सबसे ईमानदार’ नेता कहता था, लेकिन आज वही शख्स भारत के संविधान और न्यायपालिका के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है। अरविंद केजरीवाल—एक ऐसा नाम जो आज भ्रष्टाचार और अवसरवाद का पर्याय बन चुका है। कल तक जब अदालतें इन्हें जमानत देती थीं, तो ये कहते थे ‘न्याय की जीत हुई’। लेकिन जैसे ही कानून का शिकंजा कसा, आज यही केजरीवाल भारत के हाई कोर्ट और उसके जजों को डराने और धमकाने पर उतर आए हैं।
दुनिया के इतिहास में शायद ही कोई ऐसा ‘घटिया’ नेता हुआ होगा, जो अब यह तय करना चाहता है कि उसका केस कौन सा जज सुनेगा और कौन सा नहीं! क्या केजरीवाल अब देश के कानून से भी ऊपर हो गए हैं? दोस्तों, केजरीवाल ने कल एक 9 मिनट का वीडियो जारी किया। इस वीडियो में उन्होंने जो कहा, वह सुनकर किसी भी देशभक्त का खून खौल जाएगा। उन्होंने सीधे तौर पर माननीय जस्टिस सूर्यकांत शर्मा की अदालत में पेश होने से मना कर दिया।
तर्क क्या दिया? कि जस्टिस शर्मा एक RSS के कार्यक्रम में गए थे और उनके बच्चे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के पास काम करते हैं तो ये संभव है की वो फैसला मेरे पक्ष में नहीं सुनाएंगी। केजरीवाल साहब, क्या आप यह कहना चाहते हैं कि इस देश के जज आपकी मर्जी से फैसला सुनाएंगे? क्या आपकी ये ‘टैक्स पेयर’ वाली ईमानदारी अब जजों के परिवार पर कीचड़ उछालने तक गिर गई है? यह सीधे तौर पर न्यायपालिका को ब्लैकमेल करने की कोशिश है। अगर कल को कोई खूंखार अपराधी कहे कि मुझे यह जज पसंद नहीं है क्योंकि इसके रिश्तेदार पुलिस में हैं, तो क्या देश में कानून बचेगा? केजरीवाल की यह मानसिकता दिखाती है कि उन्हें न तो संविधान पर भरोसा है और न ही लोकतंत्र पर। उन्हें बस अपनी ‘सत्ता की हवस’ और ‘शराब घोटाले’ के पाप को छुपाना है। अरे शर्म करो केजरीवाल! आज आप महात्मा गांधी की समाधि पर जाकर ‘सत्याग्रह’ का नाटक कर रहे हैं। जिस बापू ने पूरी जिंदगी शराब को समाज का सबसे बड़ा अभिशाप बताया, उसी बापू की कसम खाकर आपने दिल्ली के कोने-कोने में शराब की नदियां बहा दीं। बापू कहते थे—’शराब इंसान का विवेक मार देती है’, और आपने तो दिल्ली के विवेक को ही ‘एक पर एक फ्री’ की बोतल में डुबो दिया।
बापू सत्याग्रह करते थे अन्याय के खिलाफ, और आप सत्याग्रह कर रहे हैं ‘शराब घोटाले’ की सजा से बचने के लिए। बापू ने कभी अदालतों का अपमान नहीं किया, लेकिन आप उन्हीं की शरण में जाकर अपनी गंदी राजनीति को ढंकने की कोशिश कर रहे हैं। यह सत्याग्रह नहीं, यह बापू की आत्मा का अपमान है। दिल्ली की जनता पूछ रही है—जहाँ स्कूल और अस्पताल होने चाहिए थे, वहाँ आपने शराब के ठेके क्यों खोले? क्या यही आपका ‘स्वराज’ था? अब बात करते हैं केजरीवाल के ‘दाहिने हाथ’ मनीष सिसोदिया की। भ्रष्टाचार की गंगा में इन्होंने भी जमकर डुबकी लगाई है।
2024 के चुनाव हलफनामे को उठाकर देखिए, सिसोदिया जी ने स्वीकार किया है कि उन्होंने अपने बेटे की शिक्षा के लिए 1.50 करोड़ रुपये का कर्ज लिया। लेकिन यहाँ सबसे बड़ा पेच है—यह कर्ज किससे लिया गया? यह कर्ज लिया गया अशोक मित्तल के भाई और उनकी पत्नी से। वही अशोक मित्तल, जिन्हें आम आदमी पार्टी ने अपनी पार्टी के कोटे से राज्यसभा सांसद बनाया! जनता बेवकूफ नहीं है सिसोदिया जी। पहले आप किसी को राज्यसभा की कुर्सी देते हैं और फिर उसी के परिवार से करोड़ों का ‘लोन’ लेते हैं? यह लोन है या ‘सीट बेचने’ की दलाली?
और सबसे बड़ा सवाल—एक जेल से छूटा हुआ नेता डेढ़ करोड़ का कर्ज कैसे उतारेगा? क्या इसके लिए भी कोई नया ‘शराब घोटाला’ करने की तैयारी है? दोस्तों , आज आम आदमी पार्टी का असली चेहरा बेनकाब हो चुका है। ये वो लोग हैं जो अन्ना हजारे के कंधे पर चढ़कर आए थे राजनीति बदलने, लेकिन आज इन्होंने राजनीति का स्तर ही गिरा दिया है। जब पकड़े जाते हैं, तो ‘विक्टिम कार्ड’ खेलते हैं। जब कोर्ट फटकार लगाती है, तो जजों को बदनाम करते हैं। और जब चोरी पकड़ी जाती है, तो राजघाट जाकर ड्रामा करते हैं।
सावधान रहिए, क्योंकि जो नेता आज एक जज की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है, वो कल को आपके वोट और आपके अधिकारों पर भी सवाल उठाएगा। केजरीवाल जी, आप चाहे जितने वीडियो बना लें, कानून अपना काम करेगा और ‘सच की रफ्तार’ कभी रुकेगी नहीं।
आप क्या सोचते हैं केजरीवाल के इस ‘अधर्म-सत्याग्रह’ के बारे में? कमेंट में अपनी राय ज़रूर दें। देखते रहिए ‘सच की रफ्तार’, जहाँ हम दिखाते हैं वो सच, जिसे छुपाने की कोशिश की जाती है। जय हिंद!
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