कैमरे पर ‘आदर्शवाद’ का ढोंग, कैमरे के पीछे ₹3 लाख की घूस! ‘पोस्टर बॉय’ CO Aakash Rauniyar की खुली पोल! | Sach Ki Raftar

कैमरे पर ‘आदर्शवाद’ का ढोंग, कैमरे के पीछे ₹3 लाख की घूस! ‘पोस्टर बॉय’ CO Aakash Rauniyar की खुली पोल! | Sach Ki Raftar

जब कोई युवा सिविल सर्विस का इंटरव्यू देने जाता है, तो उसके चेहरे पर एक गजब का आदर्शवाद होता है। वो बड़ी-बड़ी बातें करता है—’साहब, मैं समाज सेवा करना चाहता हूँ’, ‘मैं भ्रष्टाचार मिटाना चाहता हूँ’, ‘मैं जनता और सरकार के बीच का पुल बनना चाहता हूँ’। सुनकर देश के लाखों युवाओं को मोटिवेशन मिलता है, कोचिंग संस्थान उनके वीडियो चमकाकर करोड़ों का धंधा करते हैं।

लेकिन क्या हो… जब कैमरे के सामने जनता की भलाई की कसमें खाने वाला वही अफसर, कैमरे के पीछे अपने ही विभाग के कर्मचारी से लाखों की घूस लेते रंगे हाथों पकड़ा जाए?” “आज कहानी बिहार के एक ऐसे ही चर्चित युवा प्रशासनिक अधिकारी की, जो पहले अपनी सफलता के लिए कोचिंग्स का पोस्टर बॉय बना, और आज ₹3 लाख की रिश्वतखोरी के आरोप में सलाखों के पीछे है। नाम है—आकाश कुमार रौनियार। क्या है यह पूरा मामला और कैसे खुलेआम चल रहा था प्रति केस ₹50000 की वसूली का खेल?

आज के इस वीडियो में हम इस पूरे सिस्टम को डिकोड करेंगे।” “दोस्तों, मामला बिहार के रोहतास जिले के सासाराम का है। वहां अंचलाधिकारी यानी सर्किल ऑफिसर (CO) के पद पर तैनात थे आकाश कुमार रौनियार। उन पर आरोप है कि वो जमीन के दाखिल-खारिज और रिकॉर्ड करेक्शन जैसे कामों के लिए मोटी रकम वसूल रहे थे। लेकिन इस कहानी में ट्विस्ट यह है कि उनकी शिकायत किसी आम जनता ने नहीं, बल्कि उन्हीं के विभाग के एक राजस्व कर्मचारी राकेश कुमार ने की।

राकेश कुमार का आरोप था कि यह साहब हर एक दाखिल-खारिज के केस को पास करने के लिए प्रति केस ₹50000 की फिक्स घूस मांगते थे। Vigilence Investigation Bureau पिछले 3 महीने से इस अफसर पर नजर रखे हुए थी। राकेश कुमार की शिकायत के मुताबिक, जमीन के एक बड़े मामले में सीओ साहब ने पहले ₹8 लाख की डिमांड की थी। काफी मोल-भाव के बाद सौदा ₹6 लाख में तय हुआ। और तय रणनीति के तहत, 22 मई की सुबह इस ₹6 लाख की पहली किस्त यानी ₹3 लाख दी जानी थी। विजिलेंस की टीम ने सासाराम के मोरसराय इलाके में जाल बिछाया। जैसे ही सीओ के निजी कर्मी सोनू कुमार ने पैसे लिए, टीम ने उसे दबोच लिया और उसके तुरंत बाद आकाश कुमार रौनियार को उनके किराए के आवास से गिरफ्तार कर लिया गया।अब जरा विजिलेंस के डीएसपी पवन कुमार के आधिकारिक बयान को गौर से सुनिए। पूछताछ में साहब ने पहले तो साफ इनकार कर दिया कि उन्होंने कोई पैसा नहीं लिया। लेकिन जांच एजेंसियों के पास पुख्ता सबूत थे। 

सीओ साहब खुद इतने शातिर थे कि उन्होंने पैसे सीधे अपने हाथ में नहीं लिए, बल्कि अपने निजी कर्मचारी सोनू कुमार को भेजा कि—’जाओ नीचे से पैसा लेकर आओ और मेरे कमरे में रख दो।’ लेकिन कानून के हाथ लंबे होते हैं, उनके कमरे से पूरे ₹3 लाख की नकद राशि बरामद की गई। सोचिए, एक अदने से काम के लिए, जिसके लिए जनता दफ्तरों के चक्कर काटती है, वहां ₹50000 प्रति केस की बंधी-बंधाई घूस ली जा रही थी।

जो किसान, जो गरीब अपनी जमीन के कागज ठीक कराने आता होगा, उस पर क्या गुजरती होगी? चलिए अब बात करते हैं कि आखिर ये आकाश कुमार रौनियार हैं कौन? पूर्वी चंपारण के रहने वाले आकाश ने पहले मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने सिविल सर्विस का रुख किया। उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने लगातार दो बार BPSC की परीक्षा पास की—2021 में 64वीं और 2022 में 65वीं परीक्षा। पहले वे रेवेन्यू ऑफिसर बने और फिर सर्किल ऑफिसर।

इस सफलता के बाद, सोशल मीडिया और बड़े-बड़े कोचिंग इंस्टीट्यूट्स के यूट्यूब चैनल्स पर इनके मॉक इंटरव्यूज बाढ़ की तरह वायरल हो गए। लाखों एस्पिरेंट्स इन्हें अपना रोल मॉडल मानने लगे। अब जरा स्क्रीन पर चल रहे इस इंटरव्यू में उनके दिए जवाब को सुनिए— जब इंटरव्यूअर ने पूछा: ‘अगर आप SDM बनते हैं, तो सबसे पहले क्या करेंगे?’ आकाश का जवाब था: ‘सर, मैं जनता की बुनियादी जरूरतों—रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा और सुरक्षा पर काम करूँगा।

अफसर का सबसे बड़ा काम जनता और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाना है।’ “वाह! क्या बात है! तालियां बजनी चाहिए इस जवाब पर। कैमरे के सामने कितनी खूबसूरती से रोटी, कपड़ा और मकान की बात की जा रही थी। लेकिन असल जिंदगी में जैसे ही कुर्सी मिली, बुनियादी जरूरतें जनता की नहीं, बल्कि खुद की तिजोरी भरने की बन गईं!” दोस्तों, यह मामला सिर्फ एक भ्रष्ट अफसर की गिरफ्तारी का नहीं है। यह उस भरोसे का कत्ल है, जो देश के लाखों मध्यमवर्गीय छात्र खुली आंखों से देखते हैं।

दिल्ली के मुखर्जी नगर से लेकर पटना के बोरिंग रोड तक, कड़कड़ाती धूप और ठंड में, एक छोटे से कमरे में रहकर जो छात्र दिन-रात पढ़ाई करते हैं कि एक दिन वो अफसर बनकर सिस्टम बदलेंगे… जब वो ऐसे आदर्शवादी चेहरों को ₹3 लाख की घूस लेते देखते हैं, तो उनका हौसला टूट जाता है। यह सवाल उन कोचिंग संस्थानों पर भी है जो बिना बैकग्राउंड चेक किए, सिर्फ अपने व्यूज और विज्ञापनों के लिए किसी को भी ‘महानायक’ बनाकर पेश कर देते हैं।”

“इंटरव्यू में आदर्शों की बातें करने वाले और हकीकत में रिश्वत लेने वाले ऐसे अफसरों पर आपकी क्या राय है? क्या ऐसे लोगों पर और सख्त कार्रवाई होनी चाहिए? कमेंट सेक्शन में अपनी राय जरूर साझा करें। वीडियो को लाइक और शेयर करना न भूलें, और ऐसे ही कड़वे सच जानने के लिए चैनल को सब्सक्राइब जरूर करें। मिलते हैं अगले वीडियो में। जय हिंद!”

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