“कॉकरोच पॉलिटिक्स” और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़, Congress ने शुरू की असली और नकली कॉकरोच की लड़ाई | Sach Ki Raftar
देश का युवा आज सड़कों पर है। पेपर लीक से उसका भविष्य अंधकार में है, बेरोजगारी से उसकी उम्मीदें टूट रही हैं। लेकिन देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी इस वक्त क्या कर रही है? वो युवाओं को न्याय दिलाने के बजाय सोशल मीडिया पर एक नया खेल—’कॉकरोच-कॉकरोच’ का खेल रही है! जी हां, सही सुना आपने। जिस उम्र में युवाओं के हाथ में नौकरी और सही नीतियां होनी चाहिए थीं, उस उम्र में कांग्रेस की यूथ विंग उनके गुस्से को ‘मीम्स’, ‘रैप सॉन्ग्स’ और ‘कॉकरोच’ जैसे मजाकिया टैग्स में तब्दील कर रही है। आज बात करेंगे कि कैसे गंभीर मुद्दों को एक मज़ाक बनाकर, कांग्रेस देश के भविष्य यानी हमारे यूथ के साथ खिलवाड़ कर रही है। “मामला शुरू होता है नीट (NEET) पेपर लीक और छात्रों के भविष्य से। छात्र परेशान हैं, इंसाफ मांग रहे हैं। लेकिन इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) ने इस गंभीर गुस्से को भुनाने के लिए क्या रास्ता चुना? इंडियन यूथ कॉकरोचेस’ नाम से एक सोशल मीडिया पेज! दावा किया गया कि ‘हमें कॉकरोच कहा गया, तो हमने इसे अपनी मजबूती बना लिया।’
अब सवाल यह उठता है कि क्या देश के युवाओं की साख, उनकी मेहनत और उनके आंसुओं की कीमत सिर्फ एक सोशल मीडिया ट्रेंड बनकर रह गई है? जब सरकार से संसद से लेकर सड़क तक नीतिगत और ठोस सवाल पूछे जाने चाहिए थे, तब कांग्रेस की युवा विंग गानों और मीम्स की बाढ़ ला रही है। क्या मीम्स बनाने से पेपर लीक माफिया जेल जाएंगे? या फिर रील्स (Reels) वायरल होने से युवाओं को रोजगार मिल जाएगा?”
“इस पूरे मामले में कांग्रेस का बचकाना रवैया तब और उजागर हो जाता है, जब वो एक सोशल मीडिया पेज ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के साथ ‘असली-नकली’ की लड़ाई में उलझ जाती है। सीजेपी के फाउंडर अभिजीत दीपके पर तंज कसे जा रहे हैं, जो खुद बॉस्टन में बैठकर सोशल मीडिया हैंडल चला रहे हैं। कांग्रेस के नेता बकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस और बयानों में यह साबित करने में जुटे हैं कि ‘कॉकरोच थीम’ का पहला आइडिया उनका था!
जरा सोचिए, देश की मुख्य विपक्षी पार्टी की यूथ विंग इस बात का रोना रो रही है कि ‘तकनीकी खराबी की वजह से हमारी वेबसाइट एक दिन बाद लाइव हुई, नहीं तो कॉकरोच वाला आइडिया हमारा था।’ कांग्रेस को इस बात की चिंता नहीं है कि युवा कितनी मुश्किल में है। उन्हें चिंता इस बात की है कि सोशल मीडिया पर ‘फॉलोअर्स’ बटोरने का और इंटरनेट पर वायरल होने का क्रेडिट कहीं कोई और न ले जाए!”
“कांग्रेस के सांसद शशि थरूर ने भी माना कि विपक्ष जनता के गुस्से को सही तरीके से भुनाने में नाकाम रहा। और जब भुनाने की कोशिश की भी, तो इतनी देर से और इतने सतही स्तर पर कि वो सिर्फ एक राजनीतिक नौटंकी बनकर रह गई। कांग्रेस का दावा है कि उनके कार्यकर्ता सड़कों पर हैं। लेकिन सोशल मीडिया पर उनकी प्राथमिकताएं देखिए—’एआई (AI) वीडियो किसने बनाए?’, ‘वेबसाइट पहले किसने लाइव की?’, ‘सच्चा कॉकरोच कौन है?’
यह सीधे-सीधे युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। जब आपको युवाओं के लिए एक मजबूत विजन, एक कड़ा रोडमैप और सरकार को घुटनों पर लाने वाली रणनीति पेश करनी चाहिए थी, तब आप इंटरनेट पर ‘कॉकरोच टाइम्स’ चला रहे हैं। क्या देश का युवा अपनी गंभीर समस्याओं के बदले विपक्ष से इस तरह के सतही मनोरंजन की उम्मीद करता है? सियासत का यह कैसा रंग है जहां युवाओं के भविष्य की चिंता से बड़ा ‘सोशल मीडिया का फेम’ हो गया है?
एक तरफ सरकार की नीतियां कटघरे में हैं, तो दूसरी तरफ विपक्ष का यह बचकाना और गैर-जिम्मेदाराना रवैया है, जो युवाओं के गुस्से को एक गंभीर आंदोलन बनाने के बजाय एक ‘ट्रेंडिंग हैशटैग’ में सिकोड़ कर रख देना चाहता है। युवाओं को अब खुद सोचना होगा कि जो पार्टियां उनके भविष्य के मुद्दों को सिर्फ सोशल मीडिया की टाइमलाइन तक सीमित रखना चाहती हैं,
क्या वो कभी उनके हक की असली लड़ाई लड़ पाएंगी? या फिर वे सिर्फ वोट बैंक और इंटरनेट रीच के लिए युवाओं के कंधों का इस्तेमाल कर रही हैं? इस पूरे ‘कॉकरोच वॉर’ और कांग्रेस की इस राजनीति पर आपकी क्या राय है? क्या आपको लगता है कि मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाया जा रहा है? कमेंट करके हमें जरूर बताएं। वीडियो को शेयर करें ताकि यह कड़वा सच हर युवा तक पहुंचे। धन्यवाद।”
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