खाकी को धमकी, लोकतंत्र पर चोट: क्या बंगाल में अब ईमानदारी की सजा मिलेगी? | Ajay Pal Sharma | Mamata Benarjee | Sach Ki Raftar
“लोकतंत्र में चुनाव जनता का पर्व होता है, लेकिन पश्चिम बंगाल में यह ‘धमकी’ और ‘दहशत’ का पर्व बनता जा रहा है। ताजा मामला एक जांबाज IPS अधिकारी अजय पाल शर्मा का है। TMC प्रवक्ता रिजू दत्ता ने खुलेआम कैमरे के सामने एक वर्दीधारी को धमकी दी है कि ‘4 तारीख के बाद भाजपा भी तुम्हें बचा नहीं पाएगी’। यह बयान सिर्फ एक अधिकारी को धमकी नहीं है, बल्कि उस पूरी व्यवस्था को चुनौती है जो निष्पक्ष चुनाव कराना चाहती है। क्या बंगाल में खाकी की मर्यादा नेताओं के पैरों की जूती बन गई है?
आज हम बात करेंगे ममता बनर्जी के राज में उस तानाशाही की, जहाँ कानून का पालन करना ‘गुलामी’ कहलाता है और बम-बंदूक की राजनीति करना ‘अधिकार’।” “पिछले दो दिनों से सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो में IPS अजय पाल शर्मा अपनी ड्यूटी निभाते दिख रहे हैं। वे उन असामाजिक तत्वों को पकड़ रहे हैं जो चुनाव में गड़बड़ी फैलाने की फिराक में थे। जहाँ बंगाल के कई इलाकों से बम मिलने और हिंसा की खबरें आती हैं, वहाँ एक अधिकारी डटकर खड़ा है ताकि आम नागरिक निडर होकर वोट डाल सके।
लेकिन विडंबना देखिए, जो अधिकारी शांति व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश कर रहा है, वह ममता दीदी के नेताओं को खटकने लगा है। क्यों? क्योंकि वे उनके ‘मनसूबों’ को कामयाब नहीं होने दे रहे। TMC के राज में चुनाव का मतलब क्या सिर्फ हिंसा और बूथ कैप्चरिंग रह गया है? क्या कोई अधिकारी अपनी ड्यूटी ईमानदारी से नहीं कर सकता?” “TMC प्रवक्ता रिजू दत्ता ने अजय पाल शर्मा को ‘BJP का गुलाम’ करार दिया। यह आज के दौर का सबसे घटिया हथियार बन गया है—जब आप किसी अधिकारी को डरा न पाएं, तो उसे सत्ताधारी पार्टी का एजेंट बता दें।
सवाल यह है कि अगर अजय पाल शर्मा गलत थे, तो उनके खिलाफ सबूत कहाँ हैं? रिजू जी, अगर आपके पास प्रमाण हैं तो न्यायालय जाइए, चुनाव आयोग जाइए, मीडिया के सामने सबूत रखिए। लेकिन नहीं, आप तो धमकी दे रहे हैं कि ‘FIR होगी’। क्या आप यह स्वीकार कर रहे हैं कि 4 तारीख के बाद आपकी सरकार पुलिस का इस्तेमाल सिर्फ बदला लेने और फर्जी मुकदमे दर्ज करने के लिए करेगी? क्या पुलिस और कानून आपके निजी नौकर हैं?”
“ममता बनर्जी अक्सर केंद्र पर तानाशाही का आरोप लगाती हैं, लेकिन उनकी अपनी नाक के नीचे उनके प्रवक्ता एक IPS को धमकाते हैं। यह धमकी सिर्फ अजय पाल शर्मा को नहीं है, बल्कि उन तमाम अधिकारियों को संदेश है कि ‘अगर हमारे हिसाब से नहीं चले, तो अंजाम भुगतने को तैयार रहो’। बंगाल में चुनाव का मतलब बम और बंदूक क्यों बन गया है? क्यों यहाँ हर चुनाव के बाद खून की होली खेली जाती है? जब एक प्रवक्ता सरेआम एक वर्दीधारी को डराता है, तो सोचिए राज्य के आम भाजपा कार्यकर्ता या साधारण जनता का क्या हाल होता होगा?
यह सीधे तौर पर संवैधानिक मशीनरी की विफलता है।” “अजय पाल शर्मा जैसे अधिकारी देश की संपत्ति हैं। अगर उन्हें धमकी दी जाएगी, तो कोई भी अधिकारी निष्पक्ष होकर काम नहीं कर पाएगा। रिजू दत्ता और TMC नेतृत्व को यह समझना होगा कि सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन संस्थाएं और उनका सम्मान बना रहना चाहिए। 4 तारीख को नतीजे जो भी हों, क्या बंगाल में कानून का राज होगा या फिर ‘धमकी’ का? क्या ममता बनर्जी अपने प्रवक्ता के इस बयान पर माफी मांगेंगी या फिर इस ‘बदला संस्कृति’ को और बढ़ावा देंगी?
आज वक्त है कि हम अजय पाल शर्मा जैसे उन अधिकारियों के साथ खड़े हों जो अपनी जान हथेली पर रखकर लोकतंत्र की रक्षा कर रहे हैं। वरना वह दिन दूर नहीं जब वर्दी सिर्फ नेताओं के हुक्म बजाने वाला एक कपड़ा बनकर रह जाएगी। आप क्या सोचते हैं इस धमकी के बारे में? कमेंट में जरूर बताएं।”
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