घर Bharat में, दिल Pakistan में, कौन हैं ये ‘अमन प्रेमी’? | Pakistan Attack | Sach Ki Raftar
क्या आपने उन यूट्यूबर्स की खबर देखी, जो पाकिस्तान जाकर भारत की जासूसी कर रहे थे? लेकिन आज बात उन लोगों की, जो भारत में रहते हैं… यहीं कमाते हैं, खाते हैं… और फिर भी कहते हैं “घुटन होती है!” जिन्हें चैन की सांस पाकिस्तान में आती है…ये कौन लोग हैं? आइए, जानते हैं!
शुरुआत करते हैं दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह से… जो कहते हैं कि उन्हें भारत में डर लगता है, लेकिन पाकिस्तान जाकर कहते हैं – “घर आ गया हूं।”
भाई, इतनी मोहब्बत पाकिस्तान से? फिर कहते हैं – “अगर कोई मेरे बच्चों से पूछे कि तुम हिंदू हो या मुसलमान, तो उनके पास जवाब नहीं होगा।” लेकिन जब मुंबई हमलों में आतंकियों ने हिंदुओं से पूछकर उन्हें मारा… तब नसीर साहब खामोश थे।
क्या यह डर सिर्फ भारत के लिए रिज़र्व है? भाई, इतना प्यार तो घर वाले भी ना दें जितना पाकिस्तान ने दे दिया। 😂 शायद ISI ने Welcome Kit दी होगी – ‘घर वापसी’ के सर्टिफिकेट के साथ!
अगला नाम – जावेद अख्तर , पाकिस्तान जाकर कहते हैं – “भारत की सड़कों पर गरीबी दिखती है, पाकिस्तान में नहीं!” क्या कराची का कोई स्लम उन्हें नजर नहीं आया या उन्हें वीआईपी टूर कराया गया? अमन की आशा में मशगूल जावेद साहब जब आतंक की बात आती है, तो शायद वो आशा उन्हें दिखती ही नहीं! पाकिस्तानी एक्ट्रेस बुशरा अंसारी ने तक उन्हें चुप रहने की सलाह दे दी। भाई साब! इतनी बार पाकिस्तान गए हैं कि उधर की मिट्टी भी अब शेर कहती है – “क्या खूब वफादार निकले जनाब, बॉर्डर पार भी दिल लुटा आए!”
अब बात स्वरा भास्कर की… कहती हैं – “लाहौर न देखो तो क्या देखा?”
लंदन, न्यूयॉर्क, इस्तांबुल सब फेल हैं उनके लिए – पाकिस्तान के आगे! लेकिन जब भारत पर हमला होता है, तो स्वरा की टाइमलाइन ऑपरेशन सिंदूर और कश्मीर के मुद्दों पर फेक न्यूज़ से भरी होती है। आतंकवाद के खिलाफ सेना का साथ नहीं, पर गाज़ा के लिए हजारों पोस्ट्स!
स्वरा जी, ज़रा फुर्सत मिले तो कश्मीर में ऑपरेशन सिंदूर पर भी नजर डाल लीजिए।
थ्री इडियट्स के असली ‘रैंचो’ – सोनम वांगचुक हाँ वही सोनम जिन्होंने पिछले साल दिल्ली में खूब बवाल काटा था। पाकिस्तान के जलवायु सम्मेलन में हिस्सा लेते हैं, पर पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर पर एक शब्द नहीं कहते। पर्यावरण के नाम पर प्रोपेगेंडा फैलाना ठीक है, पर देश पर हमला हो और आप खामोश रहें – यह अजीब संयोग नहीं? उनकी टाइमलाइन ग्लेशियर बचाओ से भरी है, पर देश बचाओ पर साइलेंस मोड ON।
कराची लिटरेचर फेस्टिवल (KLF) में हर साल भारतीय बुद्धिजीवियों की कतार लगती है। नाम हैं – सलमान खुर्शीद, राजदीप सरदेसाई, उर्वशी बुटालिया, आसिफ नूरानी, और यहां तक कि अरविंद केजरीवाल तक को निमंत्रण गया। सवाल है – पाकिस्तान में लिटरेचर या लिकिंग?
और जनाब! अरविंद केजरीवाल जी को भी कराची लिटरेचर फेस्टिवल का न्योता मिला था। न्योता ही था, पासपोर्ट चेक नहीं हुआ! पर सवाल ये है – पाकिस्तान को आखिर इन लोगों में ऐसा क्या दिखता है?
शायद “भारत के भीतर से भारत को कोसने वाले” ब्रांड एंबेसडर चाहिए थे!
तो अगली बार अगर कोई कहे –”भारत में घुटन होती है यार…”
तो पूछना – “भाई, AC बंद है या विचारधारा फॉल्ट में है?”
अगर आपको भी लगा कि ये लोग सिर्फ “अमन की आशा” नहीं, “पॉलिटिकल मास्टरशेप” खेल रहे हैं,
तो वीडियो को लाइक करें, शेयर करें और हां – घुटन से बचने के लिए सब्सक्राइब जरूर करें!
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