चुनावी गिरगिट: पंजाब को कर्ज में डुबोकर कुर्सी बचाने का ‘मान’ खेल! Arvind Kejriwal |Sach Ki Raftar

चुनावी गिरगिट: पंजाब को कर्ज में डुबोकर कुर्सी बचाने का ‘मान’ खेल! Arvind Kejriwal |Sach Ki Raftar

4 साल तक जो वादा आईसीयू में वेंटिलेटर पर था, चुनाव के ठीक 8 महीने पहले अचानक उसमें जान कैसे गई? पंजाब की जनता को ‘मुफ्त’ का झुनझुना थमाने वाले अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि गिरगिट भी अगर रंग बदलने की ट्रेनिंग ले, तो वो आम आदमी पार्टी के दफ्तर में ही मिलेगी!”

दोस्तों, साल 2022 के चुनाव में आम आदमी पार्टी ने पंजाब की महिलाओं से एक बड़ा लोकलुभावन वादा किया था—हर महिला को ₹1000 महीना। सरकार बन गई, भगवंत मान मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठ गए, लेकिन पूरे 4 साल तक मान सरकार को इन महिलाओं की याद नहीं आई।

मगर जैसे ही अगले साल चुनाव की आहट हुई, भगवंत मान सरकार की सोई हुई आत्मा अचानक जाग गई! ‘मावाधिया सत्कार योजना’ के नाम पर सीधे 3 महीने का पैसा एक साथ खातों में ठूंस दिया गया। क्यों? क्योंकि चुनाव सिर पर हैं! अरविंद केजरीवाल दिल्ली में जो गलती कर चुके हैं—यानी सिर्फ कागजी वादे करना और जमीन पर कैश न देना—वही डर अब इन्हें पंजाब में सता रहा है। हार के डर से बौखलाई यह जोड़ी अब पंजाब के राजकोष को चुनावी दांव पर लगा रही है। इसे राजनीति नहीं, तो और क्या कहें?

यह वही आम आदमी पार्टी है जिसने चुनाव से पहले पंजाब की सबसे संवेदनशील रग—गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी (Sacrilege) के मुद्दे पर राजनीति की थी। भगवंत मान और केजरीवाल ने बड़े-बड़े मंचों से चीख-चीखकर वादा किया था कि सरकार बनते ही बेअदबी के दोषियों को ऐसी सजा मिलेगी कि मिसाल बन जाएगी। आज पंजाब की जनता पूछ रही है—कहाँ है वो इंसाफ?

सच्चाई यह है कि गुरुओं के सम्मान और पंजाब की अस्मिता के नाम पर वोट बटोरने वाले इन नेताओं ने सत्ता में आते ही इस मुद्दे को ठंडे बस्ते में डाल दिया। जो सरकार गुरुओं की बेअदबी के दोषियों को सजा नहीं दिला सकी, जिसने पंजाब की धार्मिक और सामाजिक भावनाओं के साथ सरेआम खिलवाड़ किया, वो आज चुनाव आते ही ₹1000-₹1500 का लालच देकर सिखों और पंजाबियों की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश कर रही है। यह गुरुओं के पंजाब के साथ सबसे बड़ा विश्वासघात है!

सेक्शन 3: पंजाब को कंगाली की कगार पर धकेलने का पाप

अब बात करते हैं पंजाब के खजाने की, जिसे ये दोनों नेता अपनी निजी जागीर समझकर लुटा रहे हैं:

आर्थिक संकेतक (Punjab Budget 2026)वर्तमान स्थिति / अनुमान
राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit)4.1% (जबकि सुरक्षित सीमा 3% है)
कुल देनदारी (Total Debt)45.1% (GSDP का लगभग आधा हिस्सा कर्ज)
बिजली सब्सिडी का बोझ₹15,550 करोड़
इस नई योजना का खर्च₹9,300 करोड़

सिर्फ बिजली सब्सिडी और इस चुनावी स्टंट को मिला दें, तो पंजाब पर ₹24,850 करोड़ का सीधा बोझ पड़ता है। पीआरएस (PRS) की रिपोर्ट और देश का आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) चिल्ला-चिल्ला कर कह रहा है कि यह ‘रेवड़ी कल्चर’ राज्यों को बर्बाद कर रहा है। पूरे देश में अनकंडीशनल कैश ट्रांसफर पर 1.7 लाख करोड़ उड़ाए जा रहे हैं, जो देश के कुल शिक्षा बजट (₹1.28 लाख करोड़) और स्वास्थ्य बजट (₹16,000 करोड़) से भी कहीं ज्यादा है!

केजरीवाल और मान को पंजाब के युवाओं के रोजगार, शिक्षा या स्वास्थ्य से कोई सरोकार नहीं है। इन्हें बस अपनी कुर्सी बचानी है, चाहे इसके लिए पंजाब का बच्चा-बच्चा कर्ज के बोझ तले क्यों न दब जाए।

पंजाब की जनता गैरतमंद है। वो मुफ़्त की रेवड़ियों और चुनावी रंग बदलने वाले गिरगिटों के झांसे में आने वाली नहीं है। गुरुओं की बेअदबी पर राजनीति करने वाले और पंजाब को कर्ज के दलदल में धकेलने वाले इन हुक्मरानों से जनता इस बार पाई-पाई और अपने हर एक वोट का हिसाब लेगी।”

आपकी इस पर क्या राय है? क्या भगवंत मान का यह चुनावी दांव उन्हें बचा पाएगा या जनता इस बार इस धोखे का करारा जवाब देगी? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर लिखें।

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