त्यागराज स्टेडियम विवाद से सुप्रीम कोर्ट तक: आईएएस संजीव खिरवार और रिंकू डुग्गा की पूरी कहानी | Sach Ki Raftar
सरकारी शक्तियों के दुरुपयोग से लेकर प्रशासनिक फैसलों की कानूनी लड़ाई तक, भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के 1994 बैच के एजीएमयूटी (AGMUT) कैडर दंपति—संजीव खिरवार और रिंकू डुग्गा—का मामला देश के सबसे चर्चित नौकरशाही विवादों में से एक रहा है। 2022 में दिल्ली के एक स्पोर्ट्स स्टेडियम से शुरू हुई कहानी आज केंद्र सरकार, सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT), दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के कानूनी पेचों में उलझी हुई है।
कहानी शुरू होती है 26 मई 2022 को द इंडियन एक्सप्रेस में पत्रकार एंड्र्यू एमसन (Andrew Amsan) की रिपोर्ट पब्लिश हुई। फोटोग्राफर अभिनव साह की एक तस्वीर के साथ छपी इस रिपोर्ट की हेडलाइन थी: “Stadium is emptied, athletes told to leave so that IAS officer can walk with dog”
दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम में प्रैक्टिस करने वाले एथलीट्स और कोचों ने आरोप लगाया कि उन्हें शाम 7:00 बजे तक ट्रेनिंग खत्म करने पर मजबूर किया जाता था ताकि दिल्ली के तत्कालीन राजस्व आयुक्त (Principal Secretary, Revenue) संजीव खिरवार अपने पालतू कुत्ते को वहां टहला सकें।
संजीव खिरवार ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि वे कभी-कभी अपने पेट को वहां ले जाते थे, लेकिन इससे खिलाड़ियों की प्रैक्टिस में कोई बाधा नहीं आती थी। उस समय उनकी पत्नी रिंकू डुग्गा दिल्ली सरकार में सेक्रेटरी (Land & Building) की थीं।
खबर आने के 18 घंटे के भीतर गृह मंत्रालय (MHA) ने कार्रवाई करते हुए दोनों अधिकारियों का तबादला कर दिया: संजीव खिरवार: लद्दाख स्थानांतरित किए गए और उनकी पत्नी रिंकू डुग्गा: अरुणाचल प्रदेश भेजी गईं।
27 जून 2022 को रिंकू डुग्गा ने अरुणाचल प्रदेश में Principal Secretary का पद संभाला। इसके तुरंत बाद 30 जून और फिर 7 अगस्त 2022 को उन पर बिना पूर्व अनुमति के विदेश यात्रा और छुट्टी पर जाने के आरोप लगे।
गृह मंत्रालय और डीओपीटी (DoPT) ने उनके पिछले विवादों और सर्विस रिकॉर्ड्स का रिव्यू किया। FR 56(j) / AIS Rule 16(3) के तहत मार्च 2023 में उन्हें Deadwood श्रेणी में डालते हुए कंपलसरी रिटायरमेंट की सिफारिश की गई।
मार्च 2024 में सरकार द्वारा इस आदेश पर पुनर्विचार की याचिका खारिज कर दिए जाने के बाद रिंकू डुग्गा ने कैट (CAT) का रुख किया। 8 अगस्त 2025 को सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल ने रिंकू डुग्गा के पक्ष में फैसला सुनाया।
कैट ने माना कि केवल एक विवादित घटना के आधार पर अधिकारी के हालिया उत्कृष्ट प्रदर्शन (Outstanding ACR Rating) को नजरअंदाज कर अनिवार्य सेवानिवृत्ति देना सही नहीं है।
केंद्र सरकार (DoPT) ने कैट के फैसले के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की। 15 अप्रैल 2026 को जस्टिस सी. हरिशंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की पीठ ने केंद्र की याचिका खारिज करते हुए कैट के फैसले को सही ठहराया।
केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जयमाला बाक्षी और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने एक अंतरिम आदेश (Interim Order) जारी करते हुए हाईकोर्ट के फैसले और रिंकू डुग्गा की सेवा वापसी (Reinstatement) पर रोक लगा दी। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अंतिम सुनवाई की तारीख तय की गई है।
जनवरी 2026 में संजीव खिरवार की दिल्ली वापसी हुई और उन्हें एमसीडी (MCD) का कमिश्नर नियुक्त किया गया। पर इनकी मुसीबते कम नहीं हुई उसके बाद आती है 6 सितंबर 2026 जिस दिन दिल्ली के सत्यनिकेतन इलाके में एक हॉस्टल की जर्जर इमारत गिर गई। घटना के बाद एबीवीपी (ABVP) और दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों ने एमसीडी प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठाए और एमसीडी कमिश्नर संजीव खिरवार के इस्तीफे की मांग की।
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