दलितों के नरसंघार पर Rahul Gandhi क्यों है चुप्प, कांग्रेस की घटिया राजनीती में सब चलता है

दलितों के नरसंघार पर Rahul Gandhi क्यों है चुप्प, कांग्रेस की घटिया राजनीती में सब चलता है

जो लोग आज मंचों पर खड़े होकर संविधान की किताब लहराते हैं… जो लोग खुद को दलितों का सबसे बड़ा हमदर्द और रहनुमा बताते हैं… आज उनके इतिहास के पन्नों से वो ख़ून के धब्बे मिटाने का वक्त आ गया है जो दशकों तक दबंगई और सरकारी नाकामी से बहते रहे!”आज बात किसी हवा-हवाई बयान की नहीं होगी… बात होगी आंकड़ों, सबूतों, तारीखों और सरकारी रिकॉर्ड्स की!
जब-जब देश के अलग-अलग राज्यों में कांग्रेस की सरकारें थीं, तब-तब दलितों पर ऐसे-ऐसे ज़ुल्म ढहाए गए कि इंसानियत रो पड़ी! लेकिन सत्ता में बैठे हुक्मरानों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी।
आज पर्दाफाश होगा कांग्रेस राज में हुए उन 4 बड़े दलित जनसंहारों का, जिनका सच इतिहास के पन्नों में दबा दिया गया!
तारीख: 6 अगस्त 1991। जगह: आंध्र प्रदेश का त्सुंदूर गाँव (गुंटूर ज़िला)।
उस समय राज्य में कांग्रेस के मुख्यमंत्री एन. जनार्दन रेड्डी की सरकार थी और केंद्र में कांग्रेस के प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव थे!
मामला क्या था? एक सिनेमा हॉल में दलित युवक का पैर गलती से उच्च जाति के व्यक्ति से छू गया। मामूली विवाद हुआ… और उसके बाद जो हुआ, उसने पूरे देश को झकझोर दिया।
300 से ज़्यादा दबंगों की भीड़ ने दलित बस्ती को चारों तरफ से घेर लिया। दलितों को दौड़ा-दौड़कर, नहर के किनारे काटकर बोरी में बंद किया गया और पानी में फेंक दिया गया। 8 से ज़्यादा दलितों की निर्मम हत्या कर दी गई।
सवाल यह है: जब गाँव में तनाव हफ़्तों से बढ़ रहा था, तब कांग्रेस की राज्य सरकार और पुलिस क्या कर रही थी? क्या दलितों की जान से ज़्यादा प्यारी सत्ता की कुर्सी थी?
इतिहास को और पीछे घुमाइए… 18 नवंबर 1981!
उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले का देहुली गाँव।
राज्य में कांग्रेस के मुख्यमंत्री वी.पी. सिंह और केंद्र में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी!
यहाँ दबंगों ने पुलिस की वर्दी पहनकर दलितों (जाटव समुदाय) की बस्ती पर धावा बोला। एक ही दिन में 24 बेगुनाह दलितों को गोलियों से भून दिया गया, जिनमें महिलाएँ और बच्चे भी शामिल थे।
इस जनसंहार ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। उस समय कांग्रेस सरकार की कानून-व्यवस्था की धज्जियाँ उड़ गई थीं, लेकिन जब कार्रवाई का वक्त आया, तो केवल खोखले आश्वासन दिए गए।
’29 सितंबर 2006: खैरलांजी, महाराष्ट्र। राज्य सरकार: कांग्रेस-एनसीपी (CM: विलासराव देशमुख) | केंद्र सरकार: UPA/कांग्रेस (PM: मनमोहन सिंह)’)
अब बात उस काण्ड की, जिसे याद करके आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं!
तारीख: 29 सितंबर 2006। जगह: महाराष्ट्र का खैरलांजी गाँव (भंडारा ज़िला)।
महाराष्ट्र में कांग्रेस-एनसीपी की सरकार, मुख्यमंत्री थे कांग्रेस के विलासराव देशमुख। और केंद्र में यूपीए-1 यानी कांग्रेस के प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह!
जमीन के छोटे से विवाद पर दलित भोतमांगे परिवार पर हमला हुआ।
सुरेखा भोतमांगे और उनकी 17 साल की बेटी प्रियंका को निर्वस्त्र करके पीटा गया, उनका यौन उत्पीड़न किया गया और उनके दो बेटों (रोशन और सुधीर) के साथ चारों की बेरहमी से हत्या कर दी गई!
सबसे शर्मनाक बात क्या थी?
इस दरिंदगी के बाद लगभग एक महीने तक कांग्रेस सरकार की पुलिस मामले को दबाती रही! जब नागपुर और पूरे महाराष्ट्र की सड़कों पर लाखों दलितों का गुस्सा फूटा, तब जाकर सरकार की नींद खुली।
क्या यही था कांग्रेस का ‘दलित प्रेम’? जहाँ एक पीड़ित परिवार न्याय के लिए तड़पता रहा और पुलिस लीपापोती करती रही?
और 2010 का वो मंज़र कैसे भूल सकते हैं?
तारीख: 21 अप्रैल 2010। जगह: हरियाणा का मिर्चपुर गाँव (हिसार)।
हरियाणा में कांग्रेस के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सरकार!
एक कुत्ते के भौंकने के मामूली विवाद पर दबंगों की भीड़ ने वाल्मीकि दलित बस्ती पर हमला बोला। घरों को आग के हवाले कर दिया गया।
आग में जिंदा जलकर 70 साल के बुजुर्ग ताराचंद और उनकी 18 साल की दिव्यांग बेटी सुमन की दर्दनाक मौत हो गई। 150 से ज़्यादा दलित परिवारों को अपना घर-बार छोड़कर रातों-रात गाँव से पलायन करना पड़ा!
सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा, तब जाकर केस को हरियाणा से हटाकर दिल्ली ट्रांसफर किया गया, क्योंकि पीड़ितों को स्थानीय कांग्रेस सरकार और पुलिस प्रशासन पर रत्ती भर भरोसा नहीं था!
यह केवल 4 मिसालें हैं, इतिहास ऐसे दर्जनों वाकयों से भरा पड़ा है।
जो दल आज दलितों के अधिकारों का मसीहा बनने का ढोंग करता है, उसके अपने शासनकाल में जब दलितों पर गोलियाँ चल रही थीं, जब बस्तियाँ जल रही थीं, तब उनकी संवेदनाएँ कहाँ सो रही थीं?
सवाल पूछना ज़रूरी है! क्योंकि जब तक इतिहास का सच सामने नहीं आएगा, तब तक वोट बैंक की यह राजनीति ऐसे ही मासूमों के खून पर रोटियाँ सेकती रहेगी!
आपकी इस पर क्या राय है? क्या कांग्रेस को अपने इस काले इतिहास का जवाब देश के दलितों को देना चाहिए?
अपनी राय कमेंट बॉक्स में आक्रामक तरीके से दर्ज करें!
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जय हिंद!
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