पंजाब में नशे की ओवरडोज़, ‘सफ़ेद ज़हर’ के काले साए में तिल-तिल मरती जवानी! Arvind Kejriwal | Bhagwant Mann | Sach Ki Raftar

पंजाब में नशे की ओवरडोज़, ‘सफ़ेद ज़हर’ के काले साए में तिल-तिल मरती जवानी! Arvind Kejriwal | Bhagwant Mann | Sach Ki Raftar

पंजाब की जमीनी हकीकत आज दर्द, रोने की आवाजों और उठती हुई अर्थियों से भरी पड़ी है। जिस पंजाब की माटी ने देश को अनाज दिया, जिस पंजाब को उसके गौरव और मान के कारण ‘पंथक हलका’ कहा जाता था, आज वही पंजाब सबसे काले दौर से गुजर रहा है।

अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान जिन्होंने कसम खाई थी पूण जब से नशे के कारोबार को पूरी तरीके से खत्म करने ही आज वही पंजाब नशे के काले साम्राझ का गढ़ बन चूका है।   हालत यह हो चुकी है कि 10 से 12 साल के छोटे-छोटे मासूम बच्चे आज नशे के कारोबार में धकेले जा चुके हैं। वे खुद नशा कर रहे हैं और नशा बेच भी रहे हैं। जिस पंजाब का किसान और मजदूर कभी एक-दूसरे के कंधे से कंधा मिलाकर खेत में पसीना बहाते थे, आज वही भाईचारा नशे की दलदल में बिखर चुका है।

सरहदों से लगातार आ रही नशे की खेप ने पंजाब के घर-घर में मातम फैला रखा है। माएँ रो-रोकर अपने जिगर के टुकड़ों की लाशें मांग रही हैं, मगर सत्ता के नशे में चूर नेताओं को इन बिलखती माताओं की चीखें सुनाई नहीं दे रही हैं।

आज पंजाब के किसी भी गांव के किसी भी आम नागरिक से पूछ लीजिए, बच्चा-बच्चा बता देगा कि कौन नशा बेच रहा है, किस गली में नशा बिक रहा है और कौन-कौन से सौदागर इस मौत के कारोबार में शामिल हैं।  लेकिन सवाल उठता है— जो बात गांव के एक आम नागरिक को पता है, क्या वो पंजाब पुलिस को नहीं पता? पता तो सब है पर करे क्या क्युकी पंजाब पुलिस के अधिकारी ही नशे के कारोबार के सरगना बन चुके है फिर भला अब इन्हे कौन पकड़ेगा और अगर पुलिस को पता है, तो कठोर कार्रवाई क्यों नहीं होती?

क्यों आम जनता यह आरोप लगाने पर मजबूर है कि पुलिस प्रशासन का एक हिस्सा हर महीने हफ्ता और रिश्वत लेकर इन नशा माफियाओं को संरक्षण दे रहा है? मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी की सरकार चंडीगढ़ के आलीशान AC कमरों में बैठकर ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ की कागजी बैठकें करती है, लेकिन जमीनी हकीकत में नशा माफिया बेखौफ घूम रहे हैं।    अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान की आम आदमी पार्टी दिल्ली और देश के मंचों से ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ (Freedom of Speech) और लोकतंत्र पर भाषण देती थकती नहीं। दिल्ली में जब इन पर कोई आंच आती है तो ये तानाशाही का रोना रोते हैं। लेकिन पंजाब में इनकी खुद की सरकार का असली चेहरा कुछ और ही कहानी बयां कर रहा है। पंजाब में आज लोकतंत्र नहीं, बल्कि एक डिजिटल तानाशाही कायम कर दी गई है।

आज पंजाब में जो भी स्वतंत्र पत्रकार, डिजिटल मीडिया या स्थानीय रिपोर्टर पंजाब की जमीनी हकीकत दिखा रहा है—चाहे वो अस्पतालों और सड़कों की खस्ताहाल हालत हो, या नशे से मरते युवाओं का सच—उसकी आवाज को सरकारी तंत्र का इस्तेमाल कर कुचला जा रहा है। भगवंत मान सरकार और आम आदमी पार्टी के आधिकारिक हैंडल उन पत्रकारों और स्वतंत्र चैनलों के YouTube, Facebook और Instagram अकाउंट्स पर धड़ाधड़ फर्जी Copyright Strikes मार रहे हैं। विधानसभा (Vidhan Sabha) की कार्यवाही के दृश्य, मुख्यमंत्री के सार्वजनिक बयानों की क्लिप्स, यहाँ तक कि सरकारी विज्ञापनों और प्रेस नोट की तस्वीरों को भी इन्होने अपने पिताजी की जरीब समझ लिया है और लगातार  Copyright बताकर पत्रकारों के चैनल्स डिलीट और ब्लॉक करवाए जा रहे हैं।

जो पत्रकार या सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर कॉपीराइट स्ट्राइक से भी नहीं डरते, उन पर पुलिस के जरिए फर्जी FIR, झूठे केस और उत्पीड़न का चक्रव्यूह रच दिया जाता है।

आम आदमी पार्टी की सरकार का सीधा संदेश है— “या तो हमारे चाटुकार बन जाओ, हमारे फर्जी विज्ञापनों और सोशल मीडिया के झूठे प्रमोटर बन जाओ… या फिर फर्जी एफआईआर, पुलिस प्रताड़ना और कॉपीराइट स्ट्राइक झेलने के लिए तैयार हो जाओ।”

आज पंजाब में 30 लाख से अधिक फॉलोअर्स वाले बड़े-बड़े स्वतंत्र पत्रकारों के Facebook और YouTube चैनल्स बंद करा दिए गए हैं। अदालत तक पत्रकारों को गुहार लगाने जाना पड़ रहा है कि मुख्यमंत्रियों और विधानसभा की तस्वीरें सार्वजनिक संपत्ति (Public Domain) हैं, किसी राजनीतिक दल की बपौती नहीं।

जनता ने अकाली दल और कांग्रेस से तंग आकर बड़े बदलाव के सपने के साथ भगवंत मान और केजरीवाल की पार्टी को सत्ता सौंपी थी। लेकिन आज पंजाब का युवा फिर से उसी दलदल में धकेला जा चुका है, जहाँ एक तरफ नशा उनकी जिंदगी छीन रहा है और दूसरी तरफ सरकार सच्चाई को दबाने में जुटी हुई है।

भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल को सोशल मीडिया रील्स और पीआर (PR) स्टंट्स से बाहर निकलकर पंजाब के गांवों में जमीनी हकीकत देखनी चाहिए। अगर सरकार वाकई निष्पक्ष है, तो सवाल पूछने वाले पत्रकारों के चैनल बंद करवाना बंद करे।      

पंजाब की जनता अब समझ चुकी है कि “बदलाव” के नाम पर उन्हें सिर्फ फर्जी विज्ञापनों का झुनझुना थमाया गया है, जबकि धरातल पर पंजाब आज नशे और तानाशाही की दोहरी मार झेल रहा है।

आज पूरा पंजाब नशे इकी वजह से  बर्बाद हो रहा है और इसके जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ अरविन्द केजरीवाल और भगवंत मान है। 

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