पब्लिसिटी स्टंट पड़ा भारी? ‘मोहम्मद दीपक’ के आर्थिक बहिष्कार के बाद अब कहां हैं Rahul Gandhi? Sach KI Raftar

पब्लिसिटी स्टंट पड़ा भारी? ‘मोहम्मद दीपक’ के आर्थिक बहिष्कार के बाद अब कहां हैं Rahul Gandhi? Sach KI Raftar

कहते हैं कि सस्ती लोकप्रियता और पब्लिसिटी बटोरने के लिए जब आप समाज की भावनाओं के खिलाफ जाते हैं, तो उसका अंजाम कभी न कभी भुगतना ही पड़ता है। ऐसा ही कुछ उत्तराखंड के दीपक कुमार के साथ होता दिख रहा है, जिन्होंने खुद को सुर्खियों में लाने के लिए अपना नाम ‘मोहम्मद दीपक’ बता दिया था। एक बुजुर्ग मुस्लिम दुकानदार का पक्ष लेकर बहुसंख्यक समाज के खिलाफ खड़े होने वाले दीपक को शायद लगा था कि वह रातों-रात ‘हीरो’ बन जाएंगे, लेकिन आज हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। अब जब उनका जिम बंद होने की कगार पर है, तो उन्हें अपनी इस बड़ी गलती का अहसास होने लगा है।

यह पूरा मामला 26 जनवरी 2026 को शुरू हुआ था, जब कुछ स्थानीय संगठनों के विरोध के बीच दीपक कुमार ने जानबूझकर दखल दिया और खुद को सेक्युलर दिखाने के चक्कर में अपना नाम ‘मोहम्मद दीपक’ बता दिया। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद जहां एक खास वर्ग उन्हें सिर-आखों पर बैठा रहा था, वहीं स्थानीय समाज ने इस पब्लिसिटी स्टंट को भांप लिया।

नतीजा यह हुआ कि हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले दीपक कुमार का समाज ने शांतिपूर्ण तरीके से आर्थिक बहिष्कार कर दिया। उनके जिम में आने वाले 150 लोगों की संख्या घटकर मात्र 15 रह गई। जो लोग कल तक दीपक को अपना भाई मानते थे, उन्होंने ऐसे व्यक्ति से दूरी बनाना ही बेहतर समझा जो सिर्फ चर्चा में आने के लिए बहुसंख्यक समाज को कठघरे में खड़ा कर रहा था। आज आलम यह है कि दीपक 4 महीने से अपने जिम का किराया नहीं दे पाए हैं और मकान मालिक ने उन्हें साफ कह दिया है कि वे अपनी बिल्डिंग खाली करें।

इस पूरी कहानी में सबसे बड़ा सवाल कांग्रेस और विपक्ष के बड़े नेता राहुल गांधी पर खड़ा होता है। 23 फरवरी 2026 को जब यह मामला गरमाया हुआ था, तब राहुल गांधी ने दिल्ली में दीपक कुमार से मुलाकात की थी। बड़े-बड़े कैमरे चमके, तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की गईं और राहुल गांधी ने बड़े गर्व से घोषणा की थी कि वह कोटद्वार आकर दीपक के जिम की मेंबरशिप लेंगे और वहां विजिट करेंगे।

आज जनता पूछ रही है बड़े सवाल: कहां हैं अब राहुल गांधी? क्या कोटद्वार का रास्ता वह भूल गए हैं?  क्या राहुल गांधी का दीपक कुमार को अपने घर बुलाना, उनके साथ फोटो खिंचवाना सिर्फ और सिर्फ एक ‘पॉलिटिकल स्टंट’ और मुस्लिम वोट बैंक को साधने की राजनीति थी?

कांग्रेस और राहुल गांधी का मुस्लिम प्रेम किसी से छिपा नहीं है, लेकिन आज जब उनका चहेता ‘मोहम्मद दीपक’ सड़क पर आने की स्थिति में है, तो राहुल गांधी उनके जिम को बचाने के लिए सामने क्यों नहीं आ रहे? क्यों उनकी मदद के लिए कांग्रेस का कोई फंड आगे नहीं आया?

जब यह घटना हुई थी, तब तमाम मुस्लिम संगठन और सेक्युलर राजनेता दीपक के समर्थन में खड़े दिखाई दे रहे थे। लेकिन आज जब दीपक के सामने रोजी-रोटी का संकट गहरा गया है, वह अपने घर का होम लोन नहीं चुका पा रहे हैं, तो कोई भी उन्हें बचाने नहीं आ रहा।

इससे यह साफ होता है कि दीपक कुमार सिर्फ एक राजनीतिक मोहरे की तरह इस्तेमाल किए गए। समाज के ताने-बाने को नजरअंदाज कर, बहुसंख्यक समाज के खिलाफ जाकर और केवल चीप पब्लिसिटी के लिए ‘मोहम्मद दीपक’ बनने का जो खामियाजा आज वह भुगत रहे हैं, वह उन सभी के लिए एक सबक है जो राजनीतिक रोटियां सेकने वालों के बहकावे में आ जाते हैं।

अब देखना यह है कि क्या राहुल गांधी केवल तस्वीरें खिंचवाने तक सीमित रहेंगे या वाकई कोटद्वार आकर अपनी कही बात को पूरा करेंगे? फिलहाल तो दीपक कुमार के लिए यह पब्लिसिटी स्टंट भारी पड़ता दिखाई दे रहा है।

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