बंगाल में ‘दीदी’ का खूनी खेल खत्म! चंद्रनाथ रथ के कातिलों को पाताल से खींच लाई पुलिस | Sach Ki Raftar
पश्चिम बंगाल में 200 से ज्यादा सीटें जीतकर बीजेपी ने सरकार क्या बनाई, हार से बौखलाए ‘ममता सिंडिकेट’ के गुंडों ने खून की होली खेलना शुरू कर दिया। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के सबसे भरोसेमंद साथी और पूर्व वायुसेना अधिकारी चंद्रनाथ रथ की सरेआम हत्या कर दी गई। यह सिर्फ एक मर्डर नहीं था, बल्कि नई सरकार को दी गई एक सीधी चुनौती थी। लेकिन हमलावर भूल गए कि अब बंगाल में ‘भय’ का नहीं, बल्कि ‘न्याय’ का शासन शुरू हो चुका है।
6 मई की वो काली रात… जब एक रिटायर्ड वायुसेना अधिकारी, जो देश की सेवा कर चुका था, अपने घर लौट रहा था। घर से महज 200 मीटर पहले उसे घेरकर गोलियों से भून दिया गया। हमलावरों को पता था कि टारगेट कार में कहाँ बैठा है। यह साफ इशारा है कि ममता बनर्जी के शासन में जो ‘हिंसा का कल्चर’ पनपा, उसके जड़ें कितनी गहरी हैं। ये हमलावर बाहर से बुलाए गए ‘सुपारी किलर्स’ थे, जिन्हें लगता था कि वे बंगाल में खून बहाकर आराम से फरार हो जाएंगे।
हत्यारे खुद को बहुत शातिर समझ रहे थे, लेकिन मोदी जी के ‘डिजिटल इंडिया’ के दौर में बचना नामुमकिन है। बाली टोल प्लाज़ा पर किया गया एक मात्र UPI पेमेंट उनकी बर्बादी की इबारत लिख गया। पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और बिहार पुलिस ने मिलकर मयंक राज मिश्रा, विक्की मौर्य और राज सिंह को दबोच लिया। संदेश साफ है: अब अपराधी चाहे बिहार के किसी कोने में छुपा हो या यूपी की गलियों में, बंगाल पुलिस अब उन्हें ढूंढ निकालेगी।
ममता बनर्जी के राज में हमने देखा कि कैसे पुलिस के हाथ बंधे रहते थे और अपराधी खुलेआम घूमते थे। लेकिन बीजेपी की सरकार बनते ही तस्वीर बदल गई है। 6 मई को हत्या हुई और 11 मई तक आरोपी सलाखों के पीछे पहुँच गए। यह है शुभेंदु सरकार की काम करने की रफ्तार! अब बंगाल में अपराधियों का वही हाल होगा जो उत्तर प्रदेश में होता है।
जो गुंडे कल तक टीएमसी के झंडे के नीचे छुपकर निर्दोषों का खून बहाते थे, अब उनकी संपत्तियों पर बुलडोजर चलेगा और कानून का सबसे सख्त शिकंजा कसेगा। चंद्रनाथ रथ की शहादत बेकार नहीं जाएगी। उनके पैतृक गांव कुलूप में उमड़ा जनसैलाब गवाह है कि बंगाल अब हिंसा से ऊब चुका है। ममता बनर्जी की सत्ता जाने के बाद ये आखिरी छटपटाहट है उन तत्वों की जो बंगाल को अशांत रखना चाहते हैं।
लेकिन मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने साफ कर दिया है—”बंगाल की धरती पर अब अपराधी या तो जेल में होंगे या पाताल में।”
क्या आपको लगता है कि बंगाल में अब अपराधियों के खिलाफ ‘यूपी जैसा कड़ा एक्शन’ होना चाहिए? क्या चंद्रनाथ रथ के हत्यारों को बीच चौराहे पर सजा मिलनी चाहिए? अपनी राय कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं!
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