बंगाल में Mamata Banerjee का ‘दीमक राज’ Dirty Politics में छात्रों को भी नहीं छोड़ा | Sach Ki Raftar

बंगाल में Mamata Banerjee का ‘दीमक राज’ Dirty Politics में छात्रों को भी नहीं छोड़ा | Sach Ki Raftar

₹1 करोड़ से भी ज्यादा के दीमक लगे हुए नोट… अवैध हथियार… और अय्याशी का सामान! जानते हैं यह सब कहां से मिला है? किसी अंडरवर्ल्ड डॉन के ठिकाने से नहीं, बल्कि बंगाल के ऐतिहासिक सुरेंद्रनाथ कॉलेज के अंदर बने एक टीएमसी नेता के बेडरूम से! शिक्षा के मंदिर को टीएमसी के बाहुबलियों ने अपनी अय्याशी और काली कमाई का अड्डा बना दिया था। आज बात होगी उसी दीमक की, जिसने पूरे बंगाल के भविष्य को अंदर से खोखला कर दिया है!
जिस बंगाल की धरती ने देश को महान विचारक, शिक्षा और संस्कृति दी, ममता बनर्जी के राज में उसी बंगाल को शर्मसार होना पड़ा है। सुरेंद्रनाथ कॉलेज में जब रूटीन सफाई के लिए सालों से बंद पड़े यूनियन रूम का ताला तोड़ा गया, तो अंदर का नजारा देखकर कर्मचारियों के होश उड़ गए।
अलमारी के पीछे छिपे सूटकेस में 100 और 500 के नोटों की गड्डियां ठूंस-ठूंस कर भरी थीं, जिन्हें सीलन और दीमक चाट चुके थे। शुरुआती अनुमान के मुताबिक यह ₹1 करोड़ से भी ज्यादा का अनकाउंटेड काला धन है। लेकिन पाप की कहानी यहीं खत्म नहीं होती। उसी कमरे से काले लिफाफे में लिपटा एक अवैध कट्टा मिला। यानी छात्र राजनीति के नाम पर कॉलेजों में हथियारों का जखीरा छुपाया जा रहा था!
हद तो तब हो गई जब जांच टीम कॉलेज की छत पर पहुंची। वहां पढ़ाई का कोई कमरा नहीं, बल्कि दो आलीशान लग्जरी बेडरूम मिले! महंगे गद्दे, एसी और ऐशो-आराम का पूरा इंतजाम। आरोप है कि इन कमरों का इस्तेमाल टीएमसी के बाहुबली नेता देवाशीष बंधुपाध्याय और उनका बेटा करते थे, जहां कॉलेज के छोटे कर्मचारियों से मसाज तक कराई जाती थी। कॉमन रूम और छतों से शराब की खाली बोतलें और आपत्तिजनक सामान मिला। ममता जी, क्या इसी ‘पोरिबोरतोन’ (बदलाव) का वादा आपने बंगाल की जनता से किया था? शिक्षा के मंदिर को बकायदा सिंडिकेट राज का हेडक्वार्टर बना दिया गया!
यह सड़न सिर्फ एक कॉलेज तक सीमित नहीं है। अब देखिए वो दस्तावेजी सबूत जो चीख-चीख कर बता रहे हैं कि बंगाल के लाखों छात्रों की जेब पर कैसे डकैती डाली गई। एडमिशन और रीएडमिशन के वक्त छात्रों से ‘कॉलेज मैगजीन फीस’ वसूली गई, जबकि वो मैगजीन सालों-साल छपती ही नहीं थी। पूरा पैसा फर्जी इनवॉइस बनाकर डकार लिया गया।
‘डेवलपमेंट फंड’ के नाम पर मोटी रकम ली गई, लेकिन खुद कॉलेज के प्रिंसिपल्स ने माना कि बच्चों के बैठने के लिए क्लासरूम तक नहीं थे। छात्रों के पैसे से क्लासरूम या लैब्स नहीं बनीं, बल्कि टीएमसी नेताओं के पर्सनल रिसॉर्ट बने! और सबसे बड़ा फ्रॉड—’स्टूडेंट यूनियन फीस’। साल 2016 के बाद से बंगाल के सरकारी कॉलेजों में कोई आधिकारिक छात्र संघ चुनाव नहीं हुए, फिर पिछले 10 सालों से यह करोड़ों रुपया किस हैसियत से और किसकी जेब में जाने के लिए वसूला जा रहा था?
अगर आपको लगता है कि यह सिर्फ एक कॉलेज की कहानी है, तो आप भूल कर रहे हैं। जयपुरिया कॉलेज हो, सिटी कॉलेज हो या बंगबसी कॉलेज—पूरे बंगाल में टीएमसी के राजनीतिक संरक्षण में एक अवैध स्टूडेंट काउंसिल का सिंडिकेट चल रहा था। इन गुंडों का खौफ इतना था कि प्रिंसिपल्स और प्रोफेसर्स ने इनके आगे सरेंडर कर दिया था।
कॉलेज में किसका एडमिशन होगा, कैंटीन का ठेका किसे मिलेगा, यह सब ये अवैध काउंसिल तय करती थी। बंगाल के कॉलेजों में बकायदा ‘एडमिशन सिंडिकेट’ चला, जहां एक-एक सीट के लिए ₹20,000 से लेकर ₹50,000 तक की ‘कट मनी’ वसूली गई। यह अवैध उगाही इकट्ठा होते-होते अरबों रुपयों का काला साम्राज्य बन चुकी है, जिसका रास्ता सीधे कालीघाट (शीर्ष नेतृत्व) तक जाता था लेकिन बंगाल के छात्रों के लिए राहत की बात यह है कि इस ‘दीमक राज’ के खिलाफ अब मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है! शुभेंदु सरकार ने साफ कर दिया है कि शिक्षा के मंदिर में अब कोई समानांतर अवैध सरकार या पुराना सिंडिकेट राज बर्दाश्त नहीं होगा।
सरकार ने तुरंत एक्शन लेते हुए बंगाल के सभी सरकारी और सहायता प्राप्त कॉलेजों में ‘स्टूडेंट यूनियन फीस’ वसूलने पर तत्काल प्रभाव से पूरी तरह बैन लगा दिया है। साल 2016 के बाद से इन अवैध काउंसिलों ने जितना भी पैसा लूटा है, उस पूरे फंड का फॉरेंसिक ऑडिट कराया जा रहा है। सभी कॉलेजों को 30 दिनों के भीतर इस वसूली का पूरा हिसाब सौंपने का अल्टीमेटम दिया गया है।
यह सिर्फ पैसों का भ्रष्टाचार नहीं है, यह बंगाल की आने वाली पीढ़ी के भविष्य के साथ किया गया सबसे बड़ा और अक्षमय खिलवाड़ है। लेकिन अब समय बदल चुका है। छात्रों की गाढ़ी कमाई लूटने वाले इन दीमकों का पूरा हिसाब होगा और बहुत जल्द कई बड़े रसूखदार चेहरे जेल की सलाखों के पीछे होंगे।

इस पूरे महाघोटाले पर और टीएमसी के इस सिंडिकेट राज पर आपकी क्या राय है? हमें कमेंट करके जरूर बताइए। वीडियो को दबाकर शेयर कीजिए ताकि बंगाल के शिक्षा तंत्र की यह सच्चाई हर घर तक पहुंचे। चैनल को सब्सक्राइब करना मत भूलिएगा।

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