भ्रष्टाचार का सिंडिकेट: कानपुर से आगरा तक ठेकेदार और अधिकारियों की सांठगांठ का महाघोटाला | Sach Ki Raftar
उत्तर प्रदेश में ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति और मुख्यमंत्री की भ्रष्टाचार-विरोधी प्राथमिकताओं के बावजूद, नगर निगमों और जलकल विभागों में सरकारी धन की लूट का एक गंभीर सिंडिकेट उजागर हुआ है। कानपुर से लेकर आगरा तक चर्चित ठेकेदार रवि लवानिया और उनकी सहयोगी फर्मों का जाल फैला हुआ है, जिसने सरकारी मशीनरी और भ्रष्ट अधिकारियों से मिलीभगत कर करोड़ों रुपये के टेंडर हासिल किए और विकास योजनाओं को जमकर चुना लगाया है।
सबसे पहले हम आपको लेकर चलते है उत्तर प्रदेश के कानपुर में यहाँ नगर निगम में शासन के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (SIT) की पड़ताल में टेंडर सिंडिकेट का भंडाफोड़ हो चूका है. आरोप था की अधिकारीयों की मिली भगत से दोगुनी कीमत पर टेंडर दिया गया :
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (Solid Waste Management) और कूड़ा निस्तारण के कार्यों में वास्तविक लागत ₹400 प्रति टन तय होने के बावजूद, अधिकारियों की शह पर रवि लवानिया की फर्म ‘मेसर्स एनवायरमेंट टेक्नो’ (M/s Environmental Techno) को ₹800 प्रति टन की दोगुनी दर से ठेका दे दिया गया। यानी जो काम 400 में होना था वो हुआ 800 में सीधा डबल।
जांच में धांधली और भ्रष्टाचार की पुष्टि होने पर पुलिस आयुक्त और नगर निगम की संस्तुति के आधार पर ‘एनवायरमेंट टेक्नो’ को कानपुर नगर निगम में ब्लैकलिस्ट कर दिया गया तथा उसकी सिक्योरिटी मनी भी जब्त कर ली गई। और यही नहीं इसके अलावा मध्य प्रदेश के शिवपुरी और अलीगढ़ में भी इन महाशय की धांधलियों के चलते टेंडर निरस्त किए जा चुके हैं।
अब आपको लग रहा होगा की कहानी ख़त्म पर नहीं सच्चाई ये है की जिसके मुँह हराम की कमाई लग जाये फिर वो भला घपले किये बिना कैसे रह सकता है तो अब इन्होने अपने फजीवाड़े का जाल बिछाया उत्तर प्रदेश के आगरा में। जहां पर फर्जी दस्तावेजों और टेंडर पूल का खेल खुलेमाम अधिकारीयों की मिली भगत खेलने लगा ।
कानपुर में ब्लैकलिस्ट होने के बावजूद, आगरा नगर निगम और जलकल विभाग में इसी सिंडिकेट को गंगाजल सप्लाई, सीवर सफाई और एसटीपी संचालन जैसे संवेदनशील कार्य सौंपे गए वो भी बिना जाँच पड़ताल किया। आधिकारिक साक्ष्यों और दस्तावेजों को जाँच करने से इस फर्जीवाड़े की पूरी परतें एक के बाद एक खुलती चली गई : अब जो बताएंगे उसको आप ध्यान से सुनियेगा :
कार्यालय जिलाधिकारी आगरा (न्याय सहायक-3, पत्रांक 2496, और तारीख थी 14/07/2021) की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि मेसर्स सांई ट्रेडिंग कंपनी की प्रोप्राइटर (श्रीमती सुलभा लवानिया) जो की रवि लवानिया की धर्म पत्नी है उनके नाम से जमा किया गया चरित्र प्रमाण पत्र (सं. 23/न्याय सहायक-3, तारीख 12/10/2017) कलेक्ट्रेट की निर्गत पंजिका में दर्ज ही नहीं है। यानी की वो पूरी तरह से फर्जी है।
अब आगे सुनिए जांच आख्या के अनुसार, यह प्रमाण पत्र जिलाधिकारी कार्यालय से जारी नहीं हुआ बल्कि पूरी तरह फर्जी यानी Edit करके बनाया गया था। अब सबसे बड़ी बात ये है रवि लवानिया ने अपने परिवार के लोगो के नाम पर अलग अलग कम्पनिया बनाई और एक ही परिवार के लोग ये 3 फर्मों का ‘टेंडर सिंडिकेट’ खुलेआम सरकारी अधिकारीयों की मिली भगत से चला रहे थे।
अब इस फजीवाड़े परिवार की इस मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी (CFO) की गोपनीय रिपोर्ट जो की 17/08/2018 को जारी की गई थी वो क्या कहती है इस रिपोर्ट के अनुसार, सुपर सकर मशीन से सीवर सफाई के ₹12 करोड़ के टेंडर में तीन तकनीकी रूप से सक्षम फर्में दिखाई गईं:
1. मेसर्स सुलभा एंटरप्राइजेज (प्रोप्राइटर: रवि लवानिया, पता: 28/212, पथवारी, बेलनगंज)
2. मेसर्स सांई ट्रेडर्स (प्रोप्राइटर: सुलभा लवानिया, पता: 28/212, पथवारी, बेलनगंज)
3. मेसर्स एनवायरमेंट टेक्नो (प्रोप्राइटर: रवि लवानिया, पता: 21/167, धूलियागंज)
यानी ये “तीनों फर्में एक ही व्यक्ति और उसकी पत्नी की हैं। टेंडर कमेटी के सदस्य अभियंताओं और ठेकेदार ने आपस में सांठ-गांठ करके करोड़ों रुपये के शासकीय धन के दुरुपयोग करने का गंभीर प्रयास किया है”। सबसे मजदार बात जानते है क्या है की काम सिर्फ सरकारी फाइलों में हुआ हकीकत में हुआ ही नहीं और ये फाइल ही दिखाकर सररकारी पैसा ले लिया गया।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2016 में तत्कालीन जलकल महाप्रबंधक और ठेकेदार की सांठ-गांठ से बिना काम किए भुगतान करने की जांच अपर नगर आयुक्त, डीडीओ (DDO) और डूडा (DUDA) के सहायक अभियंता की कमेटी ने की थी।
28 मार्च 2019 को प्रस्तुत जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि बेसन की बस्ती, कटघर और अन्य इलाकों में सीवर पाइप लाइनें बिछाई ही नहीं गईं। बिना कार्य के 30 मार्च 2016 को ही करोड़ों का भुगतान कर दिया गया।
शिकायत करता गोविंद प्रसाद शर्मा व अन्य नागरिकों के अनुसार, जलकल विभाग में एकाधिकार बनाए रखने के लिए ईमानदार अधिकारियों पर झूठे आरोप, दबाव और अनैतिक हथकंडे अपनाए जाते रहे हैं ताकि प्रतिस्पर्धी फर्मों को टेंडर प्रक्रिया से बाहर रखा जा सके।
गोविंद प्रसाद शर्मा की शिकायत पर अनु सचिव (उ.प्र. शासन) के निर्देश पर नगर आयुक्त आगरा ने ज्ञापन संख्या 258/एन.ए./2026 (दिनांक 20 अगस्त 2026) के तहत 3-सदस्यीय कमेटी गठित कर 7 दिनों में जांच आख्या मांगी थी। हालांकि निर्धारित समय बीतने के बाद भी अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक न होना अधिकारियों की संलिप्तता की ओर इशारा करता है।
इस पुरे घोटाले को लेकर जनमानस में आक्रोश है लोग मांग कर रहे है की इस घोटाले की SIT जांच होनी चाहिए : कानपुर की तर्ज पर आगरा नगर निगम और जलकल विभाग में वर्ष 2001 से 2026 तक रवि लवानिया और उनकी सहयोगी फर्मों (सुलभा एंटरप्राइजेज, एनवायरमेंट टेक्नो, सांई ट्रेडिंग, ईको इंडस्ट्रियल आदि) द्वारा किए गए समस्त टेंडरों और भुगतानों की स्वतंत्र एसआईटी/विजिलेंस जांच कराई जाए। सिंडिकेट से जुड़ी सभी फर्मों को तत्काल प्रभाव से राज्यभर में ब्लैकलिस्ट किया जाए और उनके समस्त चालू/लंबित सरकारी भुगतानों पर रोक लगाई जाए।
फर्जी व कूट-रचित दस्तावेजों (फर्जी चरित्र प्रमाण पत्र, बैंक सॉल्वेंसी व शपथ पत्र) का प्रयोग करने वाले ठेकेदार और उनसे साठ-गांठ करने वाले दोषी अभियंताओं व प्रशासनिक अधिकारियों के विरुद्ध प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाये वरना ये भरस्टचारी दीमक हमारे देश और प्रदेश को निगलने में समय नहीं लगाएंगे ओट अब समय आ गया है आपकी ऊँगली करने का मतलब अगर आप वीडियो के अंत तक आ गए है तो इस वीडियो को ज्यादा से ज्यादा शेयर कीजिये क्युकी आपका एक शेयर ही इन जनाब को सलाखों के पीछे पहुचायेगा और चैनल को सब्सक्राइब जरूर कीजिये ये सारी जानकारी हमे शिकायत करता ने हमारे उत्तर प्रदेश के नॉएडा के बयूरो प्रमुख राजेंद्र बर्मन को दी और उन्होंने हम तक पहुंचाई।
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