मजदूरों की मजबूरी या टीआरपी की भूख? नेहा सिंह राठौर के ‘फेक’ नैरेटिव का पर्दाफाश | Sach Ki Raftar
नमस्ते दोस्तों! आज हम बात करेंगे उस चेहरे की, जो खुद को ‘लोकगायिका’ कहती है, लेकिन जिसके सुरों में लोक-कल्याण नहीं, बल्कि केवल और केवल सरकार विरोध का ‘जहर’ घुला होता है। जी हां, हम बात कर रहे हैं नेहा सिंह राठौर की। वही नेहा, जो मजदूरों के कंधे पर बंदूक रखकर अपनी राजनीति चमकाने की कोशिश कर रही हैं। लेकिन नेहा जी, देश अब आपकी इस ‘प्रोपेगेंडा’ वाली चाल को समझ चुका है!” “हाल ही में नोएडा में मजदूरों के प्रदर्शन को लेकर नेहा सिंह राठौर ने एक लंबा-चौड़ा ट्वीट और वीडियो जारी किया।
उन्होंने इसे सरकार, उद्योगपतियों और भ्रष्टाचार का एक बड़ा चक्रव्यूह बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि उद्योगपति गिरफ्तार क्यों नहीं हुए? लेकिन नेहा जी, आप ये बताना भूल गईं कि कानून व्यवस्था को हाथ में लेना और दंगा भड़काना क्या मजदूरों का काम है? आप मजदूरों की मजबूरी को बेचकर अपनी टीआरपी बटोर रही हैं, जबकि हकीकत ये है कि भारत का मजदूर आज विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहा है।” “ये वही नेहा सिंह राठौर हैं, जिनकी विश्वसनीयता का आलम ये है कि अक्सर भारत की स्थितियों को दिखाने के लिए ये दूसरे देशों, यहाँ तक कि बांग्लादेश की पुरानी और फर्जी फोटो का इस्तेमाल करती हैं। क्या ये अपने ही देश को दुनिया भर में जलील करने की कोई अंतरराष्ट्रीय सुपारी है? क्या सिर्फ राहुल गांधी और कांग्रेस के इशारों पर नाचने के लिए आपने अपनी कलम और आवाज को गिरवी रख दिया है? “अपने ट्वीट में नेहा लिखती हैं कि सरकार मजदूरों के बच्चों को पढ़ाना नहीं चाहती ताकि वे ‘हिंदू-मुसलमान का झंडा’ उठा सकें। नेहा जी, ये आपकी ही बीमार मानसिकता है जो हर चीज में धर्म ढूंढ लेती है। आज सरकारी योजनाओं से लेकर मुफ्त शिक्षा और कौशल विकास (Skill Development) के जरिए मजदूरों के बच्चे अफसर बन रहे हैं।
लेकिन आपको ये विकास नहीं दिखेगा, क्योंकि आपका काम तो केवल उस ‘टूलकिट’ को आगे बढ़ाना है जो भारत को अंदर से कमजोर करना चाहता है। “इन्हीं भ्रामक बातों और समाज में नफरत फैलाने के कारण नेहा सिंह राठौर पर देशद्रोह तक के मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। जब आप बिना तथ्यों के सरकार को ‘असली शोषक’ बताती हैं और लोगों को भड़काती हैं, तो ये अभिव्यक्ति की आजादी नहीं, बल्कि सीधे-सीधे देश के खिलाफ साजिश है। क्या ये संयोग है कि आपकी हर ‘कहानी’ का सुर कांग्रेस के मैनिफेस्टो से मिलता है?”
“दोस्तों, नेहा सिंह राठौर जैसे लोग खुद को ‘जनता की आवाज’ कहते हैं, लेकिन असल में ये केवल सत्ता के भूखे उन नेताओं के प्यादे हैं जो चुनाव हार चुके हैं। मजदूरों का नाम लेकर अपनी दुकान चलाना बंद होना चाहिए। नेहा जी, अगर आपको राजनीति करनी है तो खुलकर मैदान में आइये, लोकगायन और मजदूरों की आड़ में ये ‘प्रोपेगेंडा’ का खेल अब और नहीं चलेगा!” “साथियों, क्या आपको भी लगता है कि नेहा सिंह राठौर मजदूरों के नाम पर राजनीति कर रही हैं? क्या विदेशी फोटो दिखाकर भारत को बदनाम करना देशभक्ति है या गद्दारी? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें .
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