ममता के ‘साम्राज्य’ का अंत? टीएमसी में महाविस्फोट! सब भागे दीदी को छोड़ कर | Sach Ki Raftar

ममता के ‘साम्राज्य’ का अंत? टीएमसी में महाविस्फोट! सब भागे दीदी को छोड़ कर | Sach Ki Raftar

पश्चिम बंगाल की राजनीति से इस वक्त की सबसे सनसनीखेज और ममता बनर्जी की रातों की नींद उड़ाने वाली खबर सामने आ रही है। जिस बंगाल में ममता दीदी ‘खेला होबे’ का नारा देकर विरोधियों को ललकारती थीं, आज उसी बंगाल में खुद उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के अंदर एक ऐसा ‘महाविस्फोट’ हो चुका है, जिसने दीदी के सियासी साम्राज्य की नींव हिलाकर रख दी है।
खबरें आ रही हैं कि टीएमसी ताश के पत्तों की तरह बिखरने वाली है! करीब 100 पार्षदों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया है, सीनियर नेता बगावत पर उतर आए हैं, और सबसे बड़ा दावा तो बीजेपी के सांसद सौमित्र खान ने कर दिया है—कि टीएमसी के 20 सांसद और 50 विधायक पाला बदलने के लिए तैयार बैठे हैं! जी हां, आपने सही सुना! अगर दिल्ली और बीजेपी नेतृत्व ने हरी झंडी दे दी, तो बंगाल में तृणमूल कांग्रेस का नामोनिशान मिटने में चंद घंटे भी नहीं लगेंगे!
दीदी की तानाशाही और पार्टी के भीतर मचे घमासान का सबसे बड़ा सबूत हैं उनकी अपनी लोकसभा सांसद काकोली घोष! विधानसभा चुनाव में टीएमसी को मिली करारी शिकस्त के बाद से ही काकोली घोष लगातार ममता बनर्जी की नीतियों की सबसे बड़ी आलोचक बनी हुई थीं। इसका बदला लेने के लिए ममता दीदी ने 14 मई को उन्हें लोकसभा में चीफ व्हिप के पद से हटाकर कल्याण बनर्जी को दे दिया। लेकिन दीदी का यह दांव उन्हीं पर भारी पड़ गया है!
इस्तीफों के सिलसिले की शुरुआत करते हुए काकोली घोष ने 25 मई को 12 जिला अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया और ठीक अगले ही दिन वो मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की बैठक में जा बैठीं! अकेले नहीं, उनके साथ टीएमसी के 6 बागी विधायक भी थे। हालांकि, इन विधायकों ने बाद में डर के मारे सफाई दी कि वे सिर्फ ‘विकास के मुद्दों’ पर मिले थे, लेकिन बंगाल के सियासी गलियारों में हर कोई जानता है कि ये सिर्फ एक बहाना है। असल खेल तो अंदर ही अंदर हो चुका है और बहुत जल्द काकोली घोष समेत कई विधायक बीजेपी का दामन थामने वाले हैं!
ममता बनर्जी की पार्टी में यह भगदड़ अचानक नहीं मची है। इसके पीछे है शुभेंदु अधिकारी सरकार का वो कड़ा फैसला, जिसने टीएमसी के भ्रष्ट नेताओं की हवा निकाल दी है। शुभेंदु सरकार ने साफ कर दिया है कि ममता राज में जितने भी कथित भ्रष्टाचार और घोटाले हुए हैं, उन सबकी चुन-चुनकर जांच होगी और गिरफ्तारियां शुरू भी हो चुकी हैं!
जैसे ही कानून का डंडा चला, टीएमसी के नेताओं में हड़कंप मच गया। हालत यह है कि कई नगर पालिकाओं के टीएमसी पार्षदों ने डर के मारे अपने दफ्तरों में जाना ही बंद कर दिया है! बीते कुछ दिनों में अलग-अलग नगर पालिकाओं के लगभग 100 पार्षदों ने अपने इस्तीफे सौंप दिए हैं। भटपारा नगर पालिका के टीएमसी उपाध्यक्ष देव ज्योति घोष ने तो ऑन-कैमरा इस्तीफा देते हुए पोल खोल दी कि कर्मचारियों को वेतन तक नहीं मिल रहा है।
नौबत यहां तक आ गई है कि कोलकाता के मेयर और ममता बनर्जी के सबसे करीबी सिपहसालार फिरहाद हकीम ने भी पद छोड़ने की इच्छा जता दी है। अगले साल होने वाले नगर निगम चुनावों से पहले ही सारे नगर बोर्ड भंग होने की कगार पर हैं और जिन नगर पालिकाओं पर दीदी का कब्जा था, वहां अब बीजेपी भगवा लहराने को तैयार है!
ममता बनर्जी की राजनीतिक कंगाली का इससे बड़ा सबूत क्या होगा कि जिस नंदीग्राम सीट को उन्होंने कभी अपनी प्रतिष्ठा का सवाल बनाया था, आज उसी नंदीग्राम में उपचुनाव लड़ने के लिए टीएमसी को कोई उम्मीदवार तक नहीं मिल रहा है! रिपोर्ट के मुताबिक, तृणमूल के दो बड़े नेताओं ने चुनाव लड़ने से साफ इंकार कर दिया है। उन्हें पता है कि वहां उतरने का मतलब है सीधे राजनीतिक मौत!
याद दिला दें कि शुभेंदु अधिकारी ने दो सीटों से चुनाव जीतने के बाद नंदीग्राम की सीट खाली की थी और कोलकाता की भवानीपुर सीट अपने पास रखी है—वही भवानीपुर सीट, जहां उन्होंने खुद ममता बनर्जी को धूल चटाई थी! ममता दीदी जो खुद चुनाव हार चुकी हैं, अब अपनी पार्टी के बिखराव को रोकने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही हैं। चुनाव के बाद हुई हिंसा और बुलडोजर एक्शन के खिलाफ टीएमसी ने विरोध प्रदर्शन रखा था, लेकिन दीदी की हैसियत देखिए कि पार्टी के 80 में से सिर्फ 36 विधायक ही प्रदर्शन में पहुंचे! बाकी के 44 विधायकों ने दीदी के फरमान को ठेंगा दिखा दिया।
कुल मिलाकर कहानी साफ है—जमीनी स्तर से लेकर संसद तक, ममता बनर्जी का साथ उनके अपने ही लोग छोड़ रहे हैं। अहंकार, भ्रष्टाचार और तुष्टिकरण की राजनीति के दम पर खड़ा किया गया टीएमसी का किला अब भरभरा कर ढह रहा है। क्या ममता बनर्जी इस महाविनाश से अपनी पार्टी को बचा पाएंगी? या फिर बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के इस अध्याय का अंत होने वाला है?
आपको क्या लगता है? क्या ममता बनर्जी का ‘खेला’ अब उनके साथ ही हो गया है? कमेंट सेक्शन में अपनी राय बेबाकी से लिखिए। इस वीडियो को ज्यादा से ज्यादा शेयर कीजिए और बंगाल की राजनीति की हर तीखी खबर के लिए हमारे चैनल को अभी सब्सक्राइब कीजिए। धन्यवाद, जय हिंद!

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