‘या तलवे चाटो, या बर्बाद हो जाओ!’… क्या रणवीर सिंह का करियर खत्म कर देगा बॉलीवुड का ये खूंखार गैंग? | Sach Ki Raftar

‘या तलवे चाटो, या बर्बाद हो जाओ!’… क्या रणवीर सिंह का करियर खत्म कर देगा बॉलीवुड का ये खूंखार गैंग? | Sach Ki Raftar

आज हम बात करेंगे उस चकाचौंध की दुनिया की, जिसके पीछे का अंधेरा इतना घिनौना है कि यहाँ नए उभरते नायकों को ‘गॉडफादर’ नहीं, बल्कि ‘गैंग्स’ तय करते हैं। हमारे देश में फिल्मों को सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि एक धर्म माना जाता है और अभिनेताओं को भगवान। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसी बॉलीवुड के पर्दे के पीछे एक ऐसा अदृश्य सिंडिकेट (गैंग) काम करता है, जो अगर चाहे तो किसी को रातों-रात अर्श पर पहुंचा दे और अगर ठान ले, तो उसका करियर हमेशा के लिए फर्श पर मिला दे!

आज बॉलीवुड के नए पोस्टर बॉय, बॉक्स ऑफिस के असली धुरंधर रणवीर सिंह इसी काले सिंडिकेट के निशाने पर हैं। फरहान अख्तर की फिल्म ‘डॉन 3’ को छोड़ने के बाद जिस तरह से रणवीर सिंह के खिलाफ ‘बहिष्कार’ (Boycott) का फतवा जारी किया गया है, उसने बॉलीवुड के ‘सिंडिकेट राज’ का पर्दाफाश कर दिया है। पहले पूरा मामला समझिए। फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी की कंपनी एक्सेल एंटरटेनमेंट जिन्होंने दिल चाहता है, लक्ष्य, जिंदगी ना मिलेगी दोबारा और गली बॉय जैसी फ़िल्में बनाईं .

अमिताभ बच्चन और शाहरुख खान के बाद रणवीर सिंह को लेकर ‘डॉन 3’ बनाने की तैयारी में थी। एक्सेल एंटरटेनमेंट का दावा है कि फिल्म के प्री-प्रोडक्शन पर वे ₹45 करोड़ खर्च कर चुके थे, लेकिन आखिरी वक्त पर रणवीर सिंह ने फिल्म में काम करने से इंकार कर दिया।  फि क्या था नुकसान से बौखलाए फरहान अख्तर ने इसकी शिकायत सीधे FWICE (फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एंप्लाइज) से कर दी।

FWICE ने रणवीर सिंह को एक के बाद एक तीन नोटिस भेजे। जब रणवीर ने दो टूक जवाब दिया कि यह संगठन कोई कानूनी अदालत नहीं है और यह मामला इसके अधिकार क्षेत्र के बाहर है, तो इस संगठन ने अपने 5 लाख सदस्यों (टेक्नीशियन, कैमरा पर्सन, डायरेक्टर, स्पॉट बॉय) को आदेश दे दिया कि कोई भी रणवीर सिंह के साथ काम नहीं करेगा! यानी फतवा जारी कर दिया गया है की कोई भी रणवीर को न तो काम देगा और न ही साथ काम करेंगे पूरी तरह बॉयकॉट जैसे की पुराने ज़माने में गांव देहात में होता था न हुक्का पानी बंद ठीक वैसे ही। 

अब सोशल मीडिया में लोग सवाल उठा रहे है की : क्या किसी कलाकार को अपनी मर्जी से फिल्म चुनने या छोड़ने का अधिकार नहीं है? क्या ₹45 करोड़ के विवाद को सुलझाने के लिए देश का कानून और अदालतें कम पड़ गई थीं, जो सीधे ‘बहाली’ और ‘बहिष्कार’ का खेल शुरू कर दिया गया? खेर अब आते हैं इस कहानी के सबसे आक्रामक और कड़वे सच पर—बॉलीवुड का इतिहास गवाह है कि यहाँ कुछ गिने-चुने खानदान, बड़े प्रोडक्शन हाउस और मठाधीशों के ‘कैंप्स’ चलते हैं।

इनकी सल्तनत का एक ही नियम है: “या तो हमारे तलवे चाटो, हमारे इशारों पर नाचो, या फिर बर्बाद होने के लिए तैयार हो जाओ। रणवीर सिंह इस समय फिल्म इंडस्ट्री के सबसे बड़े ब्रांड बन चुके हैं। उनकी पिछली दो फिल्मों—धुरंधर 1 और धुरंधर 2 ने मिलकर बॉक्स ऑफिस पर ₹3,100 करोड़ का ऐतिहासिक बिजनेस किया। यह वो दौर था जब बॉलीवुड गर्त में जा रहा था, साउथ की फिल्में हिंदी बेल्ट पर राज कर रही थीं और लोग कह रहे थे कि बॉलीवुड की क्रिएटिविटी खत्म हो चुकी है।

रणवीर सिंह और डायरेक्टर आदित्य धर की जोड़ी ने अपनी सफलता से बॉलीवुड के इन पुराने और सड़ चुके कैंप्स के एकाधिकार (Monopoly) को सीधी चुनौती दी। जब एक बाहरी या अपने दम पर खड़ा हुआ कलाकार ₹3,100 करोड़ कमा कर इंडस्ट्री का ‘पोस्टर बॉय’ बनने लगता है, तो इन पुराने मठाधीशों की गद्दियां हिलने लगती हैं। यह विवाद सिर्फ ₹45 करोड़ का नहीं है; यह विवाद ईर्ष्या, आपसी दुश्मनी और इस डर का है कि पावर अब पुराने गैंग्स के हाथ से निकलकर नए और स्वतंत्र कलाकारों

के हाथ में जा रही है। FWICE जैसी 70 साल पुरानी संस्था, जिसे कामगारों के हितों की रक्षा के लिए बनाया गया था, आज इन बड़े प्रोडक्शन हाउसेस के हाथ की कठपुतली बनकर एक सुपरस्टार का करियर खत्म करने की सुपारी लेती दिख रही है! इससे पहले यही गैंग मीका सिंह और दिलजीत दोसांझ पर भी ऐसे ही प्रतिबंध लगाने की नाकाम कोशिश कर चुका है। इस आक्रामक सिक्के का दूसरा पहलू भी है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सफलता जब सिर चढ़कर बोलती है, तो विवाद अपने आप खिंचे चले आते हैं। रणवीर सिंह हाल ही में मैसूर के चामुंडेश्वरी देवी मंदिर पहुंचे। वे वहां अपनी मर्जी से नहीं, बल्कि कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश पर प्रायश्चित करने गए थे। फिल्म ‘कांतारा’ के विवाद के दौरान रणवीर सिंह पर एक कार्यक्रम में देवी-देवताओं की नकल उतारने और आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगा था। मामला कोर्ट पहुंचा, तो रणवीर को बिना शर्त माफी मांगनी पड़ी और अदालत ने उन्हें मंदिर जाकर अपने व्यवहार पर पछतावा करने का निर्देश दिया। रणवीर सिंह की टीम का कहना है कि वे इस पूरे सिंडिकेट विवाद पर चुप हैं क्योंकि उनका ध्यान सिर्फ काम पर है और वे ‘डॉन’ फ्रेंचाइजी का सम्मान करते हैं। लेकिन बड़ा सवाल यह भी उठता है: क्या ‘धुरंधर’ की ₹3,100 करोड़ की सफलता के बाद रणवीर सिंह की फीस और डिमांड इतनी बढ़ गई कि उन्होंने फरहान अख्तर जैसे बड़े डायरेक्टर को ठेंगा दिखा दिया?

क्या सफलता के इस शिखर पर आकर रणवीर सिंह अपनी जुबान और अपने फैसलों पर काबू खो रहे हैं? बॉलीवुड के इस सिंडिकेट वार और रणवीर सिंह के इस पूरे प्रकरण से देश और आने वाले नए कलाकारों को दो कड़वे सबक मिलते हैं: जुबान पर लगाम जरूरी है: जब आप सफलता के शीर्ष पर हों, तो कम बोलिए, सोच-समझकर बोलिए और सिर्फ अपने काम पर ध्यान दीजिए।

एक गलत टिप्पणी आपको कोर्ट के चक्कर काटने और मंदिरों में नाक रगड़ने पर मजबूर कर सकती है, चाहे आप ₹3100 करोड़ के स्टार ही क्यों न हों। जब आप बड़े बनेंगे, तो बॉलीवुड का पुराना सिंडिकेट आपको गिराने के लिए ‘बहिष्कार’ और ‘नोटिस’ के भेड़िए आपके पीछे छोड़ेगा। इस इंडस्ट्री की राजनीति से निपटना है, तो सिर्फ टैलेंट नहीं, बल्कि रीढ़ की हड्डी का मजबूत होना भी बेहद जरूरी है।

यह देखना दिलचस्प होगा कि बॉलीवुड का यह ‘गैंग’ रणवीर सिंह जैसी बड़ी तोप को म्यूट कर पाता है, या रणवीर सिंह की आने वाली फिल्में इस सिंडिकेट को बॉक्स ऑफिस पर ऐसा तमाचा मारेंगी कि इनका यह अवैध बहिष्कार खुद-ब-खुद दम तोड़ देगा!

#ARanveerSinghy #farhanakhtar #bollywood #Don3 #dhuranthar #amitabhbachchan #shararukhkhan #FWICE #viralvideo #socialmedia #dharmveerjarwal #sachkiraftar

Breaking News

More like this
Related

बंगाल में Mamata Banerjee का ‘दीमक राज’ Dirty Politics में छात्रों को भी नहीं छोड़ा | Sach Ki Raftar

https://youtu.be/tU1fjdrkNYk बंगाल में Mamata Banerjee का 'दीमक राज' Dirty Politics...

दिल्ली के “मौत के होटल” और बिक चुका सिस्टम, कौन है 21 मौतों का जिम्मेदार ? Sach Ki Raftar

https://youtu.be/rnl-EFZUJ-4 दिल्ली के "मौत के होटल" और बिक चुका सिस्टम,...

TMC में महाविस्फोट! 60 विधायक अलग हुए तो खत्म हो जाएगा Mamata Banerjee का खेला! | Sach Ki Raftar

https://youtu.be/M92oTsvZL6A TMC में महाविस्फोट! 60 विधायक अलग हुए तो खत्म...