यूपी में अजब नज़ारा! अपनी ही पुलिस के खिलाफ धरने पर बैठे योगी के मंत्री | VHP | Sach Ki Raftar
“कल्पना कीजिए, राज्य में सरकार आपकी है, पुलिस आपकी है, लेकिन फिर भी आपको इंसाफ के लिए आधी रात को अपनी ही पुलिस के खिलाफ सड़क पर धरने पर बैठना पड़े! जी हां, उत्तर प्रदेश के रायबरेली में कुछ ऐसा ही हुआ, जहां योगी सरकार के कद्दावर मंत्री दिनेश प्रताप सिंह को आधी रात को सड़क पर उतरना पड़ा। वजह? पुलिस की गुंडागर्दी और एक कार्यकर्ता की पिटाई। आखिर क्या है ये पूरा माजरा और क्यों अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलना पड़ा? चलिए जानते हैं आज के इस वीडियो में।”
“मामला रायबरेली के सलोन इलाके का है। आरोप है कि बजरंग दल के जिला संयोजक विनोद मौर्य को सलोन पुलिस रात के 12 बजे उनके घर से घसीटते हुए ले गई। कार्यकर्ताओं का कहना है कि पुलिस ने न सिर्फ विनोद मौर्य को थप्पड़ मारे और गालियां दीं, बल्कि थाने ले जाकर कम्बल कुटाई तक कर दी गई, कम्बल कुटाई समझते है न आप सब ? खेर “अब सवाल ये है कि पुलिस ने ऐसा क्यों किया? पुलिस के मुताबिक, विनोद मौर्य गौकशी से जुड़े एक मामले में गवाह थे। कई बार बुलाने के बावजूद वो कोर्ट में पेश नहीं हुए,
जिसके बाद उनके खिलाफ ‘गैर-जमानती वारंट’ यानी NBW जारी हुआ था। पुलिस इसी आदेश को तामील कराने गई थी। लेकिन विवाद तब बढ़ा जब नियमों को ताक पर रखकर रात के अंधेरे में मारपीट करने के आरोप लगे।”
“जैसे ही ये खबर फैली, विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ता भड़क गए। मामला तब और गरमा गया जब यूपी के राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह खुद आधी रात को धरना स्थल पर पहुंच गए। मंत्री जी ने साफ कहा कि उनकी सरकार ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर चलती है और पुलिस का ये रवैया बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने सीधे तौर पर कोतवाल को लाइन हाजिर करने की मांग रख दी।” “सियासी पारा तब और चढ़ गया जब अगले दिन समाजवादी पार्टी के बागी विधायक मनोज पांडे भी इस धरने में शामिल हो गए। उन्होंने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए इसे पुलिस की ‘मानसिकता’ का प्रमाण बताया। प्रशासन ने दबाव देखते हुए चौकी इंचार्ज समेत तीन सिपाहियों को तो हटा दिया, लेकिन प्रदर्शनकारी अब भी सलोन कोतवाल के सस्पेंशन की मांग पर अड़े हैं।”
“जो लोग नहीं जानते, उन्हें बता दें कि दिनेश प्रताप सिंह रायबरेली की राजनीति का बड़ा चेहरा हैं। कभी गांधी परिवार के बेहद करीबी रहे दिनेश सिंह ने 2018 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थामा था। वो 2019 में सोनिया गांधी और 2024 में राहुल गांधी के खिलाफ लोकसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं। हालांकि वो चुनाव हार गए, लेकिन रायबरेली में उनका दबदबा आज भी कायम है।”
“फिलहाल मामला शांत नहीं हुआ है। एक तरफ पुलिस अपनी ड्यूटी की बात कर रही है, तो दूसरी तरफ सरकार के मंत्री ही अपनी पुलिस को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। क्या पुलिस ने मर्यादा लांघी? या फिर ये सिर्फ एक राजनीतिक दबाव है? आपको क्या लगता है? क्या मंत्री जी का अपनी ही सरकार की पुलिस के खिलाफ धरने पर बैठना सही है? अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। वीडियो पसंद आया हो तो लाइक करें और चैनल को सब्सक्राइब करना न भूलें।”
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