राम मंदिर पर सियासत: जब ‘आप कौन हैं? के अहंकार पर भारी पड़ी सादगी! Arvind Kejriwal | Sach Ki Raftar
सवाल राम मंदिर के चढ़ावे का था, लेकिन नियत सनातन और हिंदू धर्म को नीचा दिखाने की थी! राजनीति की बिसात पर जब अपनी जमीन खिसकती दिखी, तो विपक्ष ने वही पुराना पैंतरा अपनाया—भगवान राम के नाम पर राजनीति करो और सत्ता के गलियारों में अपनी जगह बनाओ। लेकिन इस बार खेल उलटा पड़ गया। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अहंकार में चूर होकर सिर्फ तीन शब्द पूछे—”आप कौन हैं?
और इन तीन शब्दों ने ऐसा राजनीतिक बवंडर खड़ा किया कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मैदान में उतरना पड़ा! आज बात सिर्फ राम मंदिर के चढ़ावे की नहीं है, बात उस घमंड की है जो जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों का अपमान करने से भी बाज नहीं आता! कहानी शुरू होती है 4 और 5 जुलाई को, जब भारतीय जनता पार्टी के नवनियुक्त नेता नितिन नवीन उत्तर प्रदेश के लखनऊ दौरे पर पहुंचते हैं। कार्यकर्ताओं का जोश, फूलों की बारिश और चुनावी बिगुल के बीच जब नितिन नवीन मंच पर आते हैं,
तो वो सीधे राहुल गांधी, अखिलेश यादव और अरविंद केजरीवाल के उस इको-सिस्टम पर हमला करते हैं जो हमेशा सनातन का अपमान होने पर मौन व्रत धारण कर लेता है। नितिन नवीन) ने एक्स (Twitter) पर सीधे ललकारते हुए कहा कि ‘हिंदू धर्म को इतना कमजोर मत समझिए कि लोग आपके झांसे में आ जाएंगे। जब हिंदू देवी-देवताओं का अपमान होता है, तो राहुल, अखिलेश और केजरीवाल के मुंह पर ताला लग जाता है।’ यह सीधे तौर पर उस छद्म धर्मनिरपेक्षता पर चोट थी, जिसका मुखौटा पहनकर ये नेता घूमते हैं।
अब इस सीधे हमले से बिलबिलाए अरविंद केजरीवाल ने अपनी आदत के मुताबिक तंज कसा। उन्होंने पूछा—”आप कौन हैं?”। वाह रे अहंकार! जो नेता खुद को ‘आम आदमी’ कहता था, आज वो सत्ता और रसूख के ऐसे नशे में है कि उसे सामने वाला कार्यकर्ता दिखाई ही नहीं देता। वो कहावत है न की बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जाएगी… और गई भी! केजरीवाल शायद भूल गए कि राजनीति में अहंकार का किला सबसे पहले ढहता है। भाजपा के नेताओं ने तुरंत केजरीवाल की याददाश्त दुरुस्त की।
प्रवेश सिंह वर्मा और अमित मालवीय ने आईना दिखाते हुए साफ कह दिया कि नितिन नवीन उस पार्टी के सिपाही हैं, जिसने तुम्हें नई दिल्ली विधानसभा सीट पर पटखनी दी थी और हार के डर से तुम दिल्ली छोड़कर पंजाब भागने पर मजबूर हो गए थे! इस विवाद में असली मोड़ तब आया, जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मैदान संभाला। पीएम मोदी ने पत्रकार पीयूष पद्माकर की दो पोस्ट शेयर कीं, जिसने केजरीवाल के अहंकार को तार-तार कर दिया।
इस पोस्ट से देश को पता चला कि जिस नितिन नवीन को केजरीवाल “आप कौन हैं” कहकर कमतर आंक रहे थे, वो एक विधायक के बेटे होने के बावजूद डीटीसी बसों में सफर करते थे, दोस्तों के झूठे बर्तन धोने और झाड़ू-पोछा करने में शर्म नहीं करते थे। प्रधानमंत्री ने साफ संदेश दे दिया कि भारतीय जनता पार्टी में सादगी और सरलता ही सबसे बड़ा गहना है, न कि केजरीवाल का वो शीशमहल और वीआईपी कल्चर, जिसके भ्रष्टाचार के किस्से आज पूरी दुनिया जानती है!
अब जरा बात करते हैं राहुल गांधी और अखिलेश यादव की। अखिलेश यादव को अचानक उत्तर प्रदेश में राम मंदिर के चढ़ावे और जमीन की याद आने लगी है। ये वही अखिलेश यादव हैं जिनकी सरकार के समय अयोध्या की सड़कों पर क्या हुआ था, यह देश कभी नहीं भूल सकता। और राहुल गांधी? जो चुनाव आते ही जनेऊधारी हिंदू बन जाते हैं, लेकिन संसद से लेकर सड़क तक सनातन को बदनाम करने का कोई मौका नहीं छोड़ते। जब राम मंदिर का निर्माण हो रहा था, तब इन नेताओं ने कोर्ट में अड़ंगे लगाए।
जब प्राण प्रतिष्ठा का ऐतिहासिक अवसर आया, तो इन्होंने निमंत्रण को ठुकरा दिया। और आज, जब मंदिर बनकर तैयार है, तो ये उसमें कमियां निकालकर, घोटाले के झूठे आरोप लगाकर हिंदुओं की आस्था को चोट पहुंचा रहे हैं। केजरीवाल ने फिर से मुद्दे को भटकाने के लिए प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है और चोरी तथा घोटाले के आरोप लगाए हैं। लेकिन देश की जनता अब समझदार है। वो जानती है कि कौन राम का है और कौन सिर्फ वोटों की खातिर ‘राम-राम’ जप रहा है।
मंदिर के चढ़ावे पर सवाल उठाने वाले पहले अपने गिरेबान में झांकें, जहां शराब नीति से लेकर महलों के निर्माण तक भ्रष्टाचार के दाग लगे हुए हैं।
आपका क्या मानना है? क्या केजरीवाल का यह तंज उनकी हताशा को दिखाता है? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर दें। वीडियो को लाइक करें, शेयर करें और चैनल को सब्सक्राइब करना बिल्कुल न भूलें। जय श्री राम!
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