शुभेंदु के ‘चाणक्य’ का कत्ल: क्या दीदी के गढ़ में हार का बदला खून से लिया जा रहा है? | Sach Ki Raftar
“बंगाल की राजनीति में ‘भवानीपुर का किला’ ढहाने वाले मास्टरमाइंड का बेरहमी से कत्ल! शुभेंदु अधिकारी के सबसे भरोसेमंद सिपाही और पूर्व एयरफोर्स जवान चंद्रनाथ रथ को गोलियों से भून दिया गया। यह सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि लोकतंत्र के सीने पर सीधा प्रहार है। जब एक पूर्व फौजी भी बंगाल की सड़कों पर सुरक्षित नहीं, तो आम जनता का क्या होगा?”
“6 मई की वो काली रात… मध्यमग्राम का जशोर रोड गोलियों की गड़गड़ाहट से कांप उठा। चंद्रनाथ रथ अपने घर बारसात लौट रहे थे, तभी मौत बनकर आए दो वाहनों ने उन्हें घेर लिया। एक चार पहिया गाड़ी ने रास्ता रोका और पीछे से बिना नंबर प्लेट की बाइक पर आए हमलावरों ने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। चार राउंड फायरिंग, जिनमें से तीन गोलियां सीधे चंद्रनाथ के शरीर के आर-पार हो गईं—दो छाती में और एक पेट में। हमला इतना सटीक था कि उन्हें अस्पताल ले जाने तक का मौका नहीं मिला।”
“कौन थे चंद्रनाथ रथ? वो सिर्फ शुभेंदु अधिकारी के पीए नहीं थे, वो उनके सबसे बड़े रणनीतिकार थे। भारतीय वायु सेना में देश की सेवा करने के बाद, उन्होंने राजनीति के मैदान में ममता बनर्जी को उन्हीं के गढ़ भवानीपुर में धूल चटाने में अहम भूमिका निभाई थी। बीजेपी का आरोप सीधा है—चूंकि चंद्रनाथ ने दीदी की हार की पटकथा लिखी थी, इसलिए उन्हें रास्ते से हटा दिया गया।”
“हार का फ्रस्ट्रेशन या खूनी बदले की आग? बीजेपी नेता केया घोष ने साफ कहा है कि यह टीएमसी की बौखलाहट है। वहीं, खुद को बचाने के लिए टीएमसी अब सीबीआई जांच का राग अलाप रही है। टीएमसी सांसद सायनी घोष इसे ‘डिस्टर्बिंग’ बता रही हैं, लेकिन सवाल यह है कि जब ममता बनर्जी की पुलिस तैनात थी, तो बिना नंबर की बाइक पर हमलावर कैसे घूम रहे थे? क्या पुलिस को मूकदर्शक बने रहने का आदेश था?”
“चुनाव खत्म हो गए, नतीजे आ गए, लेकिन बंगाल में ‘मौत का तांडव’ खत्म नहीं हुआ। पहले धमकियां, फिर रेकी और अब सरेआम कत्ल! क्या बंगाल में ममता बनर्जी की राजनीति का मतलब सिर्फ ‘लाशों पर राज’ करना रह गया है? शुभेंदु अधिकारी अस्पताल पहुंचे, आंखों में गुस्सा और दिल में दर्द लेकर, और अब बीजेपी कह रही है—जब हमारी सरकार आएगी, तो एक-एक सुपारी किलर और उनके आकाओं को पाताल से भी ढूंढ निकालेंगे।”
“क्या आपको लगता है कि बंगाल में अब कानून का नहीं, बल्कि गोलियों का राज है? क्या इस हत्या के पीछे के असली चेहरों को कभी सजा मिलेगी? अपनी राय कमेंट बॉक्स में लिखें। बंगाल की इस ‘खूनी राजनीति’ की हर परत खोलने के लिए हमारे चैनल को सब्सक्राइब करें।”
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