AAP का ‘इंकलाब’ से ‘विनाश’ तक का सफर! Raghav, Swati ने छोड़ा AAP का भर्ष्टाचारी सिंडिकेट | Sach Ki Raftar
“वो आए थे बदलने सियासत का चेहरा, मगर खुद ही नकाब ओढ़ बैठे,
कल तक जो लड़ते थे भ्रष्टाचार से, आज उसी के सिंडिकेट में जा बैठे।”
राजनीति के अखाड़े से आज एक ऐसी खबर आई है जिसने ‘कट्टर ईमानदारी’ का चोला पहनने वाली आम आदमी पार्टी की चूलें हिला दी हैं। जिस झाड़ू से भ्रष्टाचार साफ करने का वादा किया गया था, आज उस झाड़ू की तीलियां एक-एक कर बिखर रही हैं।
दोस्तों, आज की सबसे बड़ी खबर ये है कि आम आदमी पार्टी के सात महारथी—राघव चड्ढा, स्वाति मालीवाल, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, विक्रमजीत सिंह साहनी और राजेंद्र गुप्ता—ने अरविंद केजरीवाल के भर्ष्टाचार के ‘सिंडिकेट’ को लात मार दी है और बीजेपी का दामन थाम लिया है। सोचिए, जो राघव चड्ढा कल तक केजरीवाल के ‘पोस्टर बॉय’ थे, आज वो खुद उस पोस्टर से बाहर निकल गए हैं। इस पर हमारे ‘मफलर मैन’ साहब का क्या कहना है? वो कह रहे हैं, “बीजेपी ने पंजाबियों के साथ धक्का किया है।
वैसे वो शायद धोखा लिखना चाह थे परन्तु सदमा इतना भयनकर केजरीवाल साहब को लगा है की धोखा की जगह धक्का लिख रहे है खेर ” केजरीवाल साहब, धोखा बीजेपी ने नहीं किया, धोखा तो आपने उन करोड़ों लोगों की उम्मीदों के साथ किया है जिन्होंने आपको अन्ना आंदोलन की कोख से पैदा होते देखा था! याद कीजिए वो रामलीला मैदान! सफेद टोपी पहनकर आए ये लोग कहते थे—”हमें बंगला नहीं चाहिए, हमें गाड़ी नहीं चाहिए, हमें सुरक्षा नहीं चाहिए।” आज हालत ये है कि ‘आम आदमी’ के नाम पर शुरू हुई ये पार्टी ‘भ्रष्टाचार का प्राइवेट लिमिटेड सिंडिकेट’ बन चुकी है।
केजरीवाल जी के शीशमहल की कहानियाँ तो आपने सुनी ही होंगी। पर्दे करोड़ों के, टॉयलेट फिटिंग लाखों की! और ये सब उस जनता के टैक्स के पैसे से, जिसे ये ‘मुफ्त की रेवड़ी’ का लालच देते हैं। पार्टी अब इस कगार पर आ गई है कि इनके अपने नेता ही कह रहे हैं—भैया, यहाँ तो या तो भ्रष्टाचार में शामिल हो जाओ, या फिर पार्टी छोड़ दो। राघव चड्ढा और स्वाति मालीवाल जैसे नेताओं का बाहर निकलना इस बात का सबूत है कि अब पाप का घड़ा लबालब भर चुका है। आज केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के ये हालात क्यों है जानते है क्यों क्युकी केजरीवाल साहब लगातार देश और देश से झूट बोलते आये है।
केजरीवाल साहब के झूठों की लिस्ट तो इतनी लंबी है कि उस पर पूरी वेब सीरीज बन जाए। बच्चों की कसम: “मैं कभी कांग्रेस से गठबंधन नहीं करूँगा।” (आज उन्हीं की गोद में बैठे हैं)। लोकपाल: “हम सत्ता में आते ही जनलोकपाल लाएंगे।” आज कहा है वो लोकपाल। क्यों केजरीवाल लोकपाल के बारे में अब कोई बयान क्यों नहीं देते है वैसे लोकपाल तो नहीं आया, लेकिन शराब घोटाला जरूर आ गया था । ये वो नेता हैं जिन्होंने राजनीति बदलने की बात की थी, लेकिन खुद ऐसे बदले कि गिरगिट भी शर्म से पानी-पानी हो जाए!
अब बात करते हैं पंजाब की। पंजाब की भोली-भाली जनता को इन्होंने ‘बदलाव’ के नाम पर ऐसा ठगा कि आज पूरा प्रदेश कर्ज की गर्त में है। भगवंत मान साहब का क्या कहना! पंजाब की सरकार चंडीगढ़ से नहीं, बल्कि दिल्ली से रिमोट कंट्रोल द्वारा चलाई जा रही है। पंजाब का पैसा पंजाब के विकास पर नहीं, बल्कि केजरीवाल साहब के प्रचार और शाही दौरों पर ‘अय्याशियों’ की तरह उड़ाया जा रहा है। मुख्यमंत्री साहब को तो बस अपनी मस्ती से फुर्सत नहीं है, जबकि ड्रग्स और गैंगवार पंजाब को खोखला कर रहे हैं। संजय सिंह जैसे नेता टीवी पर आकर ऐसे चिल्लाते हैं जैसे उनसे बड़ा ‘हरिश्चंद्र’ कोई पैदा ही नहीं हुआ, जबकि सच्चाई ये है कि जनता अब इनकी नौटंकी को समझ चुकी है। सुखपाल सिंह खैरा ने बिल्कुल सही कहा है—अगर यही हाल रहा, तो 2027 के पंजाब चुनाव के बाद AAP का नामोनिशान मिट जाएगा। अगर पार्टी की राष्ट्रीय मान्यता छिन गई, तो केजरीवाल जी को वो सरकारी बंगला और दफ्तर की जमीन भी वापस करनी होगी। फिर शायद उन्हें फिर से उसी ‘वैगन-आर’ में घूमना पड़े, जिसे वो सादगी का प्रतीक बताकर लोगों को बेवकूफ बनाया करते थे।
तो दोस्तों, आज की खबर ने साफ कर दिया है कि ‘अराजकता’ और ‘झूठ’ की बुनियाद पर खड़ी इमारत ज्यादा दिन नहीं टिकती। जो पार्टी आंदोलन से निकली थी, वो आज आत्मसमर्पण कर चुकी है। सात सांसदों का जाना सिर्फ शुरुआत है, अंत तो अभी बाकी है।
आप लोगों को क्या लगता है? क्या केजरीवाल का ये ‘कट्टर ईमानदारी’ वाला मुखौटा पूरी तरह उतर चुका है? कमेंट सेक्शन में अपनी राय जरूर दें!
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