Arvind Kejriwal रच रहे है देश के युवाओं को भड़काने की बड़ी साजिश? | Gen-Z Genocide | Sach Ki Raftar

Arvind Kejriwal रच रहे है देश के युवाओं को भड़काने की बड़ी साजिश? | Gen-Z Genocide | Sach Ki Raftar

जब भी हम देश के दुश्मनों की बात करते हैं, तो हमारे दिमाग में तुरंत पाकिस्तान, चीन या बांग्लादेश जैसे देशों के नाम आते हैं। हमें लगता है कि खतरा सीमाओं पर है। लेकिन सोचिए, अगर खतरा सीमा पर नहीं, बल्कि देश के अंदर हो? अगर देश के सबसे बड़े दुश्मन हमारी ही छाती पर बैठकर, हमारे ही भाई-बहनों और हमारे देश के युवाओं को भड़काने का काम कर रहे हों? जी हां, आज हम बात कर रहे हैं देश के कुछ विपक्ष के नेताओं की, और खासतौर पर अरविंद केजरीवाल की।

एक ऐसा नेता, जिसके बारे में कहा जाता है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस करने और विवादों में रहने में इनका कोई मुकाबला नहीं है। लेकिन अब बात सिर्फ राजनीति की नहीं रही, बात देश की सुरक्षा और हमारे देश की ‘Gen Z’ यानी युवा पीढ़ी के भविष्य की है। एक ऐसी साजिश रची जा रही है, जिससे हमारे देश का युवा गुमराह हो सके। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला। पिछले कुछ समय से हमारे देश का युवा एक बहुत बड़ी त्रासदी से गुजर रहा है  वो है पेपर लीक।

NEET परीक्षा का कैंसिल होना, पेपर लीक होना—यह कोई छोटी बात नहीं है। देश का युवा दिन-रात एक करता है, माता-पिता अपनी जिंदगी भर की कमाई, लाखों रुपये अपने बच्चों की कोचिंग और पढ़ाई पर खर्च कर देते हैं। और अंत में क्या मिलता है? पता चलता है कि पेपर लीक हो गया और परीक्षा रद्द हो गई। यह देश के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है, और इस पर सख्त से सख्त कार्रवाई होनी ही चाहिए।

लेकिन दुख की बात यह है कि कुछ राजनेता इस संवेदनशील मुद्दे का समाधान खोजने के बजाय, इस पर राजनीति की रोटियां सेक रहे हैं। राहुल गांधी, अखिलेश यादव और अब अरविंद केजरीवाल—ऐसा लगता है जैसे इन सभी ने ठान लिया है कि युवाओं के इस गुस्से को देश के खिलाफ इस्तेमाल करना है। इनका मकसद छात्रों को न्याय दिलाना नहीं, बल्कि युवाओं को भड़काकर देश में अराजकता फैलाना है, ताकि किसी भी तरह मोदी सरकार को हटाया जा सके और अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं पूरी की जा सकें। हाल ही में अरविंद केजरीवाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा कि वो आज देश की ‘Gen Z’ से बात करने आए हैं। सच तो यह है कि देश की आम जनता ने अब शायद इन्हें सुनना बंद कर दिया है, क्योंकि जब-जब ये सामने आते हैं, तब तब कोई न कोई नया विवाद या घोटाला चर्चा में आ जाता है। लेकिन इस बार इन्होंने जो कहा, वो हैरान करने वाला है। एक व्यक्ति जो देश के एक राज्य का मुख्यमंत्री रह चुका है, वो सरेआम देश के युवाओं से कह रहा है

कि—”क्या आप CBI पर भरोसा कर सकते हैं?” सोचिए, यह देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी, देश के कानून, पुलिस और न्याय व्यवस्था पर सीधा हमला है। केजरीवाल ने अपनी ही बात में खुद को उलझा लिया। एक तरफ वो कहते हैं कि CBI हर बार 5-10 लोगों को गिरफ्तार करती है और फिर उन्हें बेल मिल जाती है, इसलिए CBI कुछ नहीं करती। और दूसरी तरफ वो ऐसा नैरेटिव बनाने की कोशिश करते हैं जैसे जांच एजेंसियां ही सब कुछ संभाल रही हैं।

भाई, पहले आप खुद तय कर लीजिए कि कहना क्या चाहते हैं! युवाओं के दिमाग में कानून और व्यवस्था के खिलाफ यह जहर क्यों घोला जा रहा है? क्या आप चाहते हैं कि देश का युवा अदालत और पुलिस पर भरोसा करना छोड़ दे? अब आते हैं उस बयान पर, जिसके बाद देश की सुरक्षा एजेंसियों को वाकई सतर्क हो जाना चाहिए। केजरीवाल ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीधे तौर पर उदाहरण दिया कि जब नेपाल और बांग्लादेश की ‘Gen Z’ सड़कों पर उतरकर सरकार बदल सकती है,

तो भारत की ‘Gen Z’ ऐसा क्यों नहीं कर सकती? केजरीवाल जी, क्या आप जानते हैं कि आप हमारे युवाओं को किस रास्ते पर भेज रहे हैं? आइए आपको इतिहास और आंकड़ों का सच बताते हैं। जब नेपाल में युवाओं ने हिंसक आंदोलन किया, तो लगभग 100 लोगों की जान गई थी, 3,000 से ज्यादा लोग बुरी तरह घायल हुए थे, जिनमें से 60 से ज्यादा तो स्कूल के मासूम छात्र थे। सैकड़ों छात्रों पर FIR दर्ज हुई और उनका करियर हमेशा के लिए बर्बाद हो गया।

और बांग्लादेश का हाल तो पूरी दुनिया ने देखा है। वहां के आंदोलन में लगभग 1,500 लोगों की मौत हुई, हजारों लोग घायल हुए और 11,000 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया। वहां की अर्थव्यवस्था तबाह हो गई। क्या अरविंद केजरीवाल भारत में भी वैसा ही खून-खराबा देखना चाहते हैं? क्या वो चाहते हैं कि भारत का युवा भी इसी तरह मौत के कुएं में कूद जाए?

यहाँ एक बहुत बड़ा और कड़वा सवाल उठता है। जिस मां-बाप का इकलौता बच्चा ऐसे दंगों और आंदोलनों की वेदी पर चढ़ जाता है,

उसकी जिंदगी कैसे नरक बन जाती है, यह जाकर उस परिवार से पूछिए। राजनीति की बिसात पर मोहरे हमेशा आम जनता के बच्चे ही क्यों बनते हैं? क्या अरविंद केजरीवाल या देश का कोई और बड़ा नेता विरोध प्रदर्शनों में, पत्थरों के बीच या दंगों में अपने बेटे या बेटी को भेजेगा? नहीं, कभी नहीं! उनके बच्चे विदेशों में पढ़ेंगे, सुरक्षित रहेंगे, आलीशान जिंदगी जिएंगे। लेकिन जब सड़कों पर उतरने, लाठियां खाने या गोलियों का सामना करने की बात आएगी,

तो आगे हमेशा गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार के बच्चों को कर दिया जाता है। नेताओं के लिए ये छात्र सिर्फ एक ‘वोट बैंक’ या सरकार गिराने का जरिया हैं, उससे ज्यादा कुछ नहीं। दोस्तों, देश के युवाओं की समस्याएं बिल्कुल वास्तविक हैं। पेपर लीक जैसी घटनाओं पर सरकार से सवाल पूछना, शांतिपूर्ण तरीके से न्याय मांगना हर नागरिक का अधिकार है। लेकिन न्याय मांगने और देश में आग लगाने में बहुत बड़ा फर्क होता है। हमें ऐसे नेताओं से बहुत सावधान रहने की जरूरत है

जो हमारे गुस्से का इस्तेमाल देश को कमजोर करने के लिए करना चाहते हैं। भारत की ‘Gen Z’ समझदार है, वो पढ़ना चाहती है, देश का विकास चाहती है, न कि किसी राजनेता की कुर्सी के लिए नेपाल या बांग्लादेश जैसी हिंसा का शिकार बनना चाहती है। सतर्क रहिए, सुरक्षित रहिए और अपनी ऊर्जा को देश के निर्माण में लगाइए, न कि किसी के राजनीतिक एजेंडे में।

इस पूरे मुद्दे पर आपकी क्या राय है? क्या आपको भी लगता है कि ऐसे बयानों से देश का माहौल खराब करने की कोशिश की जा रही है?

#arvindkejriwal #Gen-Z #Genocide #aap #pmmodi #bjp #rahulgandhi #dharmveerjarwal #sachkiraftar

Breaking News

More like this
Related

बंगाल में Mamata Banerjee का ‘दीमक राज’ Dirty Politics में छात्रों को भी नहीं छोड़ा | Sach Ki Raftar

https://youtu.be/tU1fjdrkNYk बंगाल में Mamata Banerjee का 'दीमक राज' Dirty Politics...

दिल्ली के “मौत के होटल” और बिक चुका सिस्टम, कौन है 21 मौतों का जिम्मेदार ? Sach Ki Raftar

https://youtu.be/rnl-EFZUJ-4 दिल्ली के "मौत के होटल" और बिक चुका सिस्टम,...