CJP और Toolkit Media का ‘Truck Prop’ वाला फर्जीवाड़ा बेनकाब! Delhi Police Win | Sach Ki Raftar

CJP और Toolkit Media का ‘Truck Prop’ वाला फर्जीवाड़ा बेनकाब! Delhi Police Win | Sach Ki Raftar

नमस्कार दोस्तों! देश में जब-जब कोई राजनीतिक दल या संगठन फ्लॉप होता है, तो वह जनता के मुद्दों पर बात करने के बजाय ‘विक्टिम कार्ड’ और ‘फर्जी साजिशों’ का सहारा लेता है! 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) का तथाकथित प्रदर्शन हुआ। प्रदर्शन तो पूरी तरह फ्लॉप रहा, हिंसक झड़पें हुईं, लेकिन उससे भी बड़ा ड्रामा रचा गया सोशल मीडिया पर! CJP के संस्थापकों और उनके समर्थित ‘टूलकिट मीडिया’ ने एक नई कहानी गढ़ी—’जंतर-मंतर पर पुलिस ने पत्थरों से भरा ट्रक और टूटी हुई कार प्लांट की है ताकि प्रदर्शनकारियों को फंसाया जा सके!’   

वाह भाई वाह! क्या थ्रिलर स्क्रिप्ट लिखी थी! लेकिन आज हम सबूतों और कॉमन सेंस के साथ इस फर्जी ड्रामे, CJP और उनके लिए सुपारी लेकर काम करने वाली बिकाऊ मीडिया की ऐसी धज्जियां उड़ाएंगे कि इनका हर झूठ बेनकाब हो जाएगा! वीडियो को अंत तक देखिएगा, क्योंकि आज सच सामने आकर रहेगा!”

दोस्तों, आज 2026 के डिजिटल इंडिया में किसी भी गाड़ी का मालिक कौन है, उसका चालान हुआ या एक्सीडेंट, यह पता लगाने में कितना समय लगता है? मुश्किल से 30 सेकंड! mParivahan ऐप या गाड़ी पोर्टल पर आप बस गाड़ी का नंबर डालिए, पूरी कुंडली निकलकर सामने आ जाती है। 20 जुलाई की सुबह जब CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने उस डंपर ट्रक और क्षतिग्रस्त ईको वैन की फोटो-वीडियो शेयर की, तो क्या वे 30 सेकंड निकालकर उसका ऑनलाइन रिकॉर्ड चेक नहीं कर सकते थे?

वे आसानी से देख सकते थे कि 16 जुलाई (प्रदर्शन से 4 दिन पहले) को कस्तूरबा गांधी मार्ग पर इसी डंपर और वैन का एक्सीडेंट हुआ था, जिसमें 7 लोग घायल हुए थे। एक्सीडेंट के बाद पुलिस दोनों गाड़ियों को जब्त करके संसद मार्ग थाने ले आई थी।  लेकिन नहीं! रिकॉर्ड चेक करके सच बताते तो इनका ‘विक्टिम कार्ड’ कैसे चलता? इन्हें तो माहौल बनाना था कि ‘देखिए-देखिए, पुलिस हमारे खिलाफ साजिश कर रही है!’ सच छुपाना और जनता को गुमराह करना ही इनकी पहली प्राथमिकता थी!    

अब आते हैं इस कहानी के दूसरे किरदार पर—यानी देशी के बड़े बड़े मीडिया संसथान जो अपने आप को निष्पक्ष कहते है परन्तु असल में विपक्ष की सुपारी लिए बैठे सरकार को गिराने के लिए। 

28 जुलाई को ये लोग रिपोर्ट छापते हैं और ‘खोजी पत्रकारिता’ का ढोंग रचते हैं। अरे भाई, जिस बात का पता पुलिस FIR और ट्रांसपोर्ट विभाग के ऑनलाइन डेटा से 16 जुलाई को ही लग गया था, उस पर 8 दिन बाद ‘जांच रिपोर्ट’ के नाम पर मिर्च-मसाला लगाकर परोसा जा रहा है! अब आप सोचेंगे की ये भला ऐसा क्यों कर रहे थे तो जवाब सीधा है ये लोग सरकार और पुलिस की साख को खराब करना चाहते है। ये लोग यह दिखाना चाहते है की दिल्ली पुलिस राजनीति से प्रेरित होकर गाड़ियां खड़ी कर रही है।

20 जुलाई को जंतर-मंतर पर लाठी चार्ज हुआ, बैरिकेड्स तोड़े गए, पुलिस पर पत्थरबाज़ी हुई। उस हिंसा को छुपाने के लिए इन मीडिया हाउसेस ने ‘ट्रक और वैन’ की काल्पनिक कहानी को हवा दी।

अरे भाइयों, अगर किसी थाने में जगह कम है तो जब्त गाड़ियां थाने के बाहर या पास की सड़क पर ही खड़ी की जाती हैं जो की अभी भी वही पर मौजूद है । यह दिल्ली का हर नागरिक जानता है! लेकिन टूलकिट मीडिया को तो इसमें भी ‘गहरी अंतरराष्ट्रीय साजिश’ नज़र आ रही थी!”

अब बात करते हैं कि ट्रक भलसवा या यूथ कांग्रेस दफ्तर के बाहर क्यों दिखा? दिल्ली पुलिस के डीसीपी ने साफ स्पष्टीकरण दिया कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर बड़े प्रदर्शन और वीआईपी मूवमेंट को देखते हुए, सुरक्षा कारणों से ट्रक में मौजूद मलबे/पत्थरों को खाली कराकर उसे दूसरी जगह शिफ्ट किया गया। किसी भी वीआईपी इलाके में सुरक्षा बनाए रखने के लिए यह एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया (SOP) है।  लेकिन CJP और विपक्ष का टूलकिट मीडिया क्या कहता है? ‘ट्रक भलसवा गया, फिर यूथ कांग्रेस ऑफिस के बाहर दिखा, यानी दाल में कुछ काला है!’ 

अरे बुद्धिजीवियों! जब ट्रक पुलिस की कस्टडी में एक्सीडेंटल केस की प्रॉपर्टी के तौर पर जब्त था, तो पुलिस उसे अपनी सहूलियत के हिसाब से किसी भी सुरक्षित यार्ड में ले जाएगी ना? क्या पुलिस अब कोई गाड़ी क्रेन से खींचने से पहले CJP या यूथ कांग्रेस से परमिशन लेगी?”

दोस्तों, इस पूरे मामले को जोड़कर देखिए तो आपको एक पैटर्न समझ आएगा: पहले झूठा नैरेटिव बनाओ: प्रदर्शन से ठीक 3 घंटे पहले सुबह 6:30 बजे सोशल मीडिया पर ‘ट्रक और वैन’ का वीडियो डालो ताकि अगर दोपहर में हिंसा हो, तो सारा दोष पुलिस पर मढ़ा जा सके।

जो मीडिया सरकार गिराने की सुपारी लेकर बैठी है, वही दूसरों को ‘गोदी मीडिया’ कहती है!

CJP जैसी पार्टियां और उनके समर्थित पत्रकार यह भूल जाते हैं कि देश की जनता अब जागरूक हो चुकी है।

इंटरनेट के दौर में आपका हर झूठ, हर टूलकिट 24 घंटे के भीतर बेनकाब हो जाता है! “दोस्तों! जंतर-मंतर पर पत्थरों से भरा ट्रक पुलिस ने नहीं खड़ा किया था, बल्कि CJP और विपक्ष के एजेंडे ने जनता के दिमाग में झूठ का पहाड़ खड़ा करने की कोशिश की थी। गाड़ियों के ऑनलाइन रिकॉर्ड्स से साफ है कि यह सिर्फ एक 16 जुलाई का एक्सीडेंटल केस था, जिसे राजनीतिक रंग देकर अपनी नाकामी छुपाने की कोशिश की गई। क्या आपको भी लगता है कि विपक्ष और उनके बिकाऊ मीडिया हाउसेस देश में अराजकता फैलाने और सरकार को बदनाम करने के लिए ऐसी झूठी कहानियां गढ़ते हैं? अपनी राय नीचे कमेंट सेक्शन में जरूर लिखें।  इस वीडियो को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि इन टूलकिट वालों की सच्चाई हर भारतीय तक पहुंचे! वीडियो को लाइक करें और चैनल को तुरंत सब्सक्राइब करें।

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