CJP जंतर-मंतर आंदोलन का सबसे बड़ा धोखा! Mohammad Junaid के आंसुओं का गुनहगार कौन? Sach Ki Raftar
जंतर-मंतर पर जब हजारों युवाओं की भीड़ जुटी थी, तब कुछ चेहरे मंच पर बैठकर माइक संभाल रहे थे… तालियां बटोर रहे थे! और वहीं एक लड़का ज़मीन पर खड़े होकर, तपती धूप में भूखे-प्यासों को खाना और पानी बांट रहा था—नाम था मोहम्मद जुनैद! लेकिन आज जब आंदोलन खत्म हुआ, नेता अपनी ‘जीत’ का जश्न मना रहे हैं, ढोल-नगाड़े बज रहे हैं… तब वही जुनैद कैमरे के सामने फूट-फूट कर रो रहा है! आखिर क्यों ? आखिर 36 दिन तक खाना पानी बाटने वाला जुनैद अचानक पुलिस, प्रशासन और खुफिया एजेंसियों के निशाने पर कैसे आ गया? क्यों जुनैद के पिता को एक ही दिन में दो-दो बार थाने घसीटा गया? क्यों उसकी बहन के ससुराल तक पुलिस पहुंच गई? और सबसे बड़ा सवाल—जिस CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के नेताओं को जुनैद ने जूस पिला-पिलाकर आंदोलन खड़ा करवाया, आज मुसीबत के वक्त उन्होंने जुनैद से मुंह क्यों मोड़ लिया?
क्या यह सीधे-सीधे इस्तेमाल करके फेंक देने की गंदी राजनीति है? आज की इस वीडियो में करेंगे एक-एक परत का बेबाक पर्दाफाश! गाजियाबाद के नाहल गांव का रहने वाला 26 साल का मोहम्मद जुनैद, जो वकालत की पढ़ाई कर रहा है और घर चलाने के लिए एक छोटी सी मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान चलाता है। जंतर-मंतर आंदोलन में जुनैद ने मंच से ज्यादा लंगर की जिम्मेदारी संभाली। लेकिन प्रोटेस्ट खत्म होते ही अचानक यूपी की मसूरी पुलिस उसके घर पर धावा बोल देती है! घर की तलाशी ली जाती है, पिता को थाने ले जाया जाता है, बैंक की पासबुक और पैन कार्ड तक सीज कर दिए जाते हैं! हद तो तब हो गई जब जुनैद को पकड़ने के लिए मेरठ में उसकी शादीशुदा बहन के ससुराल में दबिश दी जाती है और ससुर-जेठ को थाने में बैठा लिया जाता है! अब सवाल उठ रहा है: क्या यह सिर्फ कानूनी जांच है या किसी खास मंशा से किया जा रहा टॉर्चर?
पुलिस बिना किसी लिखित नोटिस और बिना किसी एफआईआर (FIR) के किसी के घर की पासबुक कैसे सीज कर सकती है? अगर जुनैद पर कोई केस दर्ज ही नहीं है, तो कानून की आड़ में यह दादागिरी क्यों?
वैसे सवाल तो पुरे देश की जनता के मन में भी है जो हर कोई पूछना चाहता है की एक छोटी सी मोबाइल दुकान चलाने वाला लड़का, 36 दिनों तक जंतर-मंतर पर हजारों लोगों को रोज 3 वक्त का खाना कैसे खिला सकता है? अगर एक थाली की कीमत ₹70 भी मान लें, तो 2,000 लोगों के तीन वक्त के खाने का खर्च 36 दिनों में 1.5 से 2 करोड़ रुपये से भी ऊपर जाता है! और इसमें अगर बोतल पैक पानी, कोल्ड ड्रिंक को भी जोड़ दिया जाए तो ये अकड़ा 03 करोड़ तक भी पहुंच सकता है।
जुनैद का कहना है कि यह पैसा उसकी जेब से नहीं लगा। देश-विदेश में बैठे लोग स्वैगी, जोमैटो और ऑनलाइन ऐप्स के जरिए ऑर्डर कर रहे थे और वह सिर्फ बाटने का काम देख रहा था। परन्तु सच्चाई ये भी है की हमने खुद सभी लोगो से ये पूछ था की क्या आपन CJP के प्रोटेस्ट को पैसे दान किया है तो हमे एक भी आदमी ऐसा नहीं मिला जिसने एक रुपया भी CJP को दान किया हो। और सबसे बड़ी बात ये की ये पैसा जुनैद को कहा पर डोनेट किया जा रहा था मतलब क्या पैसा उनके बैंक अकाउंट में आ रहा था ? किस सोर्स से आ रहा था ये तमाम जानकारी पुलिस जानना चाहती है और जुनैद को भी ये तमाम जानकारी सभी को बता भी देनी चाहिए। अगर सब कुछ ऑनलाइन था, तो खुफिया एजेंसियां और पुलिस क्या ढूंढ रही हैं?
क्या पुलिस को शक है कि इसके पीछे कोई ‘अदृश्य फंडिंग’ या बड़ी विदेशी साजिश है? या फिर जुनैद को सिर्फ इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वह एक दाढ़ी वाला मुस्लिम है जिसने पूरे आंदोलन की रसद को संभाले रखा था?”
आज धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद मंच पर बैठने वाले नेता-अभिजीत और सौरव दास जश्न मना रहे हैं, नाच रहे हैं, गा रहे हैं, ‘हेलो फ्रांस’ कहकर प्रधानमंत्री मोदी का मजाक उड़ा रहे हैं! लेकिन जिस लड़के ने 36 दिन तक अपनी जान जोखिम में डालकर इन्हें खाना खिलाया, आज जब उसके घर पुलिस घडी है, तो ये नेता गायब हैं! आज जुनैद खुद कैमरे पर रोते हुए कह रहा है कि ‘CJP ने मेरा साथ उस तरह से नहीं दिया, जैसे देना चाहिए था।’ ये हम नहीं कह रहे है ये सब खुद जुनैद ने इंटरव्यू में बताया है।
मंच वाले नेता एसी कमरों में बैठकर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं, लेकिन जो लड़का जमीन पर लंगर चला रहा था, उसे अकेला छोड़ दिया गया! क्या आंदोलन के आकाओं के लिए जुनैद सिर्फ एक ‘टूल’ था? काम निकल गया, तो पहचान मिटा दी?”
दोस्तों, आज मामला सिर्फ जुनैद का नहीं है। सवाल यह है कि अगर कल को देश का कोई आम नागरिक किसी आंदोलन में भूखे लोगों को 2 बोतल पानी या 4 रोटी देने पहुंचेगा, तो क्या आंदोलन खत्म होने के बाद पुलिस उसके घर की पासबुक जब्त करेगी? क्या मंच पर बैठने वाले नेता जश्न मनाएंगे और लंगर चलाने वाला जेल की सलाखों के पीछे सड़ेगा?
अगर ऐसा ही चलता रहा, तो आगे से कोई भी इंसान किसी मुसीबत में फंसे लोगों की मदद करने से पहले 100 बार सोचेगा!
यहाँ हम जुनैद से भी ये कहना चाहेंगे की पैसा किसने दिया ? कहा से राशन आया? किस किस ने पैसे से मदद की ये तमाम जानकरी जुनैद को पुलिस को बता देनी चाहिए ताकि पुलिस का जो वाजिब शक है वो दूर हो सके क्युकी पुलिस अपना काम कर रही है अगर पैसा गलत तरीके से आया है तो उसकी जाँच होना तो बनता है।
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