Jaya Bachchan को नफरत है सामाजिक मुद्दों वाली Bollywood फिल्मो से ? | Politics | NewZ Front

Jaya Bachchan को नफरत है सामाजिक मुद्दों वाली Bollywood फिल्मो से ? | Politics | Sach Ki Raftar

जया बच्चन जी जो हाल फिलहाल अक्षय कुमार स्टारर टॉयलेट और पैडमैन जैसी सोशल मैसेज करने वाली मूवीज पर कटाक्ष करती और उनके नाम का मजाक बनाती दिखी वे शायद अपने पति अमिताभ बच्चन का वो पीकू फिल्म वाला किरदार भूल गई जिसमें भास्कर बनर्जी के रोल में बच्चन साहब ने केवल कॉन्स्टिपेशन और मोशन की ही बातें की…..  खैर हो भी सकता है कि जया जी भूल गई हो क्योंकि वैसे भी राज्यसभा सांसद जया मैडम को तो अपने नाम के साथ अमिताभ शब्द जोड़ने में भी शर्मिंदगीगी होती है याद नहीं है आप लोगों को कि कैसे अपने नाम के साथ अमिताभ शब्द जुड़ा सुनकर वे राज्यसभा चेयरमैन पर आग बबला हो गई थी. …….. अरे वही कोई जया जी को बताएं कि टॉयलेट और एडममैन जैसी मूवीज नाम पर नहीं बल्कि अपने सामाजिक मुद्दों की वजह से ब्लॉकबस्टर रही और देखा जाए तो उन मूवीस में दिखाई गई सरकार की योजनाओं को आम जनता तक पहुंचाने का ये एक सबसे दिलचस्प सिनेमाई तरीका है .

आज भी अगर देखें तो सिनेमा बहुत ही इंपैक्टफुल तरीका है आम जनता तक अपनी बात पहुंचाने का अगर किसी फिल्म मेकर को लगा कि घर में शौचालय होना चाहिए और देश में कुछ वर्क ऐसा भी है जहां 2025 में भी घर में शौचालय नहीं है तो हाइजीन और क्लीननेस का मैसेज देते हुए अगर वह फिल्म बना देते हैं तो प्रोपोगेंडा फिल्म बन गई और सबसे दुखद बात तो यह है कि जया जी खुद एक फिल्मी कलाकार होने के बावजूद ऐसी सामाजिक मुद्दों पर आधारित फिल्मों के हंसी मजाक उड़ा रही हैं तो प्रश्न तो उनसे करने चाहिए कि क्यों कभी उन फिल्मों की बातें नहीं की जाती जिन्हें 1975 के आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी ने बैन करवा दिया था .

क्यों उस दौरान जब कांग्रेस की सरकार फिल्मों के द्वारा अपनी योजनाएं और इंदिरा गांधी के गुणगान गाती थी तब इस पर कोई विरोध क्यों नहीं करता था याद कीजिए 1975 का वो समय जब वी हैव प्रॉमिससेस टू कीप और आर इंदिरा जैसी फिल्में केवल इंदिरा गांधी और उनके 20 पॉइंट प्रोग्राम वाली योजना की प्रशंसा के लिए बनाई गई दोस्तों कांग्रेस पार्टी जो आज छावा साबरमती रिपोर्ट द केरला स्टोरी और द कश्मीर फाइल्स जैसी वास्तविक जीवन पर आधारित फिल्मों को प्रोपोगेंडा बताती है वे खुद आपातकाल जैसे भारत के काले अध्याय के दौरान अपना निजी राजनीतिक एजेंडा चला रही थी और यही नहीं अपना एजेंडा चलाने के साथ-साथ वे कांग्रेस पार्टी ही थी जिन्होंने कई ऐसी फिल्मों पर सेंसरशिप लगाया जो तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के जीवन और राजनीति से जुड़ी थी चलिए आपको इसके कुछ उदाहरण देती हूं गुलजार की 1975 की फिल्म आंधी जो फरवरी 1975 में रिलीज हुई और 24 हफ्तों तक चली सुचित्रा सेन और संजीव कुमार अभिनत फिल्म आंधी में मुख्य भूमिका में आरती देवी अपने पारिवारिक सरोकारों को पीछे छोड़कर अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे ले जाती हैं 1975 में इसके रिलीज के समय फिल्म की मार्केटिंग कुछ ऐसे पोस्टरों के साथ की गई

जिनमें दावा किया गया था अपने प्रधानमंत्री को स्क्रीन पर देखें लेकिन यह फिल्म 1975 के आम चुनाव को प्रभावित ना कर सके इसलिए इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया कुछ ऐसा ही हाल अमृत नाटा की प्रसिद्ध आपातकाल विरोधी फिल्म किस्सा कुर्सी का के साथ हुआ 1975 में बनी यह फिल्म कभी रिलीज ही नहीं हुई उस समय सूचना प्रसारण मंत्री विद्या चरण शुक्ला और इंदिरा के 29 वर्षीय बेटे संजय गांधी ने फिल्म के सभी प्रिंट नष्ट कर दिए थे लेकिन संजय गांधी को फिर इसका भारी नुकसान भी झेलना पड़ा शबाना आजमी राज बब्बर और मनोहर सिंह अभिनेत यह फिल्म 1977 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी के खिलाफ जनता पार्टी के अभियान में एक महत्वपूर्ण साधन बन गई आपातकाल के दौरान दुर्व्यवहार की जांच के लिए जनता पार्टी सरकार द्वारा गठित शाह आयोग ने संजय गांधी को फिल्म के प्रिंट नष्ट करने का दोषी पाया और सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमानत से इंकार किए जाने के बाद संजय ने 1 महीने तिहाड़ जेल में बिताया इसके अलावा संजय गांधी के जबरन नसबंदी भियान को लेकर भी एक फिल्म बनाई गई नसबंदी नाम की इस फिल्म में मशहूर गायक किशोर कुमार ने एक गाना गांधी तेरे देश

में गाया जिसमें जबरन नज़बंदी के खिलाफ देश के गुस्से को दर्शाया गया तो दोस्तों आप लोग देखिए कि कैसे ये विपक्षी दल के नेता जो आज मोदी सरकार पर फ्रीडम ऑफ स्पीच एंड एक्सप्रेशन खत्म करने का आरोप लगाते हैं वे खुद यह सेंसरशिप वाली नीव आज से कई साल पहले रख चुके थे इनका लक्ष्य हमेशा से एक ही रहा है कि सिनेमा पर अपना दबदबा बना रहे ताकि जनता तक इनकी सरकार की गुमराह कर देने वाली राजनीति ना पहुंच सके और आज जब भारतीय सिनेमा काल्पनिक से वास्तविक सिनेमा की ओर बढ़कर एक रियलिस्टिक फ़क्चुअल और सोशल इश्यूज पर आधारित मुद्दे जनता तक पहुंचा रहा है तब इस पूरे विपक्षी इकोसिस्टम को खुजली सी मच गई है दोस्तों आप हमें कमेंट सेक्शन में अपनी कोई ऐसी पसंदीदा फिल्म का नाम बताएं जो सामाजिक मुद्दों को हाईलाइट करती हो अगर आपको हमारा कंटेंट पसंद आया तो हमें लाइक शेयर और सब्सक्राइब जरूर करें धन्यवाद

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