Kejriwal के ‘तेल ट्वीट’ का पूरा सच! क्या Punjab सरकार आपको लूट रही है? पेट्रोल-डीजल का असली गणित | Sach Ki Raftar

Kejriwal के ‘तेल ट्वीट’ का पूरा सच! क्या Punjab सरकार आपको लूट रही है? पेट्रोल-डीजल का असली गणित | Sach Ki Raftar

सुबह के 8 बजे थे। दिल्ली और पंजाब के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अपने हाथ में चाय का कप लिए ट्विटर (अब X) पर एक पोस्ट लिख रहे थे: “तेल के दाम फिर बढ़ गए। हम फिर भी रूस और ईरान से सस्ता तेल नहीं ले रहे। मोदी जी की ऐसी क्या मजबूरी है?”

पोस्ट शेयर होते ही सोशल मीडिया पर उनके कार्यकर्ताओं ने तालियां बजानी शुरू कर दीं। केजरीवाल जी को लगा कि उन्होंने केंद्र सरकार को घेर लिया है। लेकिन तभी उनके कमरे में उनके एक पढ़े-लिखे आर्थिक सलाहकार (Economic Advisor) ने प्रवेश किया। सलाहकार के चेहरे पर चिंता की लकीरें थीं।

“सर, ट्वीट तो अच्छा है, लेकिन जनता अगर आंकड़े मांग लेगी तो हम फंस जाएंगे,” सलाहकार ने धीरे से कहा।

दोस्तों, सबसे पहले बात करते हैं इंटरनेशनल मार्केट की। केजरीवाल जी ने कहा कि तेल के दाम बढ़ गए हैं और इसके लिए सिर्फ भारत सरकार जिम्मेदार है। लेकिन अगर आप पिछले 6 महीनों का ग्लोबल डेटा देखें, तो कहानी कुछ और ही है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान-इजरायल संकट की वजह से कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमत $69 प्रति बैरल से उछलकर $114 प्रति बैरल तक जा पहुंची है।”

पिछले कुछ महीनों में सिर्फ भारत में नहीं, बल्कि: यूरोपीय संघ (EU): में पेट्रोल 13.6% और डीजल 33.7% महंगा हुआ है। फ्रांस और स्वीडन: में ईंधन की कीमतें करीब 29.3% तक बढ़ गईं।  लक्ज़मबर्ग: में तो ये आंकड़ा 33.8% को छू गया।

इतना ही नहीं, अगर आप दुनिया के सबसे महंगे पेट्रोल वाले देशों को देखेंगे—जैसे हांगकांग, मोनाको, सिंगापुर और ब्रिटेन—तो वहां भारतीय रुपयों में पेट्रोल की कीमत 150 रुपये से लेकर 220 रुपये प्रति लीटर तक है। यानी वैश्विक मंदी और युद्ध के माहौल में भी भारतीय बाजार काफी हद तक संभला हुआ है।”

“अब आते हैं सबसे दिलचस्प पॉइंट पर। केजरीवाल जी ने ट्वीट तो कर दिया, लेकिन क्या उन्हें पता है कि उनकी अपनी सरकार पंजाब की जनता की जेब कैसे काट रही है? राजनीति का दोहरा मापदंड देखिए। केंद्र सरकार की तेल कंपनियां (OMCs) देश के सभी राज्यों को एक ही बेस प्राइस पर तेल देती हैं—जो लगभग 50 से 55 रुपये प्रति लीटर होता है। इस पर केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी लगभग 20 रुपये के आसपास फिक्स है।”

“लेकिन जैसे ही ये पेट्रोल पंजाब बॉर्डर पार करता है, आम आदमी पार्टी की सरकार इस पर टैक्स की बौछार कर देती है! 16.58% VAT (वैल्यू ऐडेड टैक्स)। उसके ऊपर 10% का एडिशनल टैक्स।  और यहीं नहीं रुके, 2050 रुपये प्रति किलोलीटर (यानी करीब 2.05 रुपये लीटर) का ‘स्पेशल सेस’! और तो और, अर्बन ट्रांसपोर्ट फंड और स्पेशल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फीस के नाम पर अलग से वसूली।”

यानी पंजाब सरकार बिना कुछ किए, सिर्फ टैक्स के नाम पर जनता से सीधे 15 से 18 रुपये प्रति लीटर का मुनाफा कमा रही है! केजरीवाल जी, केंद्र से मजबूरी पूछने से पहले, पंजाब में वैट (VAT) कम करके वहां की जनता को राहत क्यों नहीं दे देते? वहां कौन सी मजबूरी है?”

“अब उनके ट्वीट के दूसरे हिस्से को समझते हैं—रूस और ईरान का सच। केजरीवाल जी ने दावा किया कि हम रूस से तेल नहीं ले रहे। दोस्तों, ये फैक्ट बिल्कुल गलत है। सच्चाई ये है कि भारत इस संकट के समय भी रूस से रिकॉर्ड तोड़ तेल खरीद रहा है। मार्च और अप्रैल के महीनों में भारत ने रूस से रोजाना 19 लाख से 22 लाख बैरल कच्चे तेल का आयात किया है।”

“हाँ, अमेरिकी प्रतिबंधों (Sanctions) की वजह से पेमेंट और जहाजों के इंश्योरेंस में दिक्कतें जरूर आती हैं, लेकिन भारतीय कूटनीति की वजह से भारत को इस पर छूट मिली हुई है। हालांकि, अब रूस खुद ग्लोबल क्राइसिस के कारण पहले जैसा ‘भारी डिस्काउंट’ नहीं दे पा रहा है।  और रही बात ईरान की… तो ईरान पर अमेरिका और UN के कड़े प्रतिबंध हैं। ईरान के साथ युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है और मुख्य समुद्री रास्ते (Strait of Hormuz) ब्लॉक हैं। अगर भारत अंतरराष्ट्रीय नियमों को पूरी तरह ताक पर रखकर ईरान से तेल खरीदेगा, तो भारत के बैंकिंग सिस्टम पर वैश्विक बैन लग सकता है, जिससे हमारा पूरा इंटरनेशनल ट्रेड ठप हो जाएगा। इसे मजबूरी नहीं, देश हित में ली गई ‘समझदारी’ और कूटनीति कहते हैं।”

“तो दोस्तों, सच आपके सामने है। ट्विटर पर बैठकर 280 अक्षरों में जनता को गुमराह करना बहुत आसान है। लेकिन जब आप आंकड़ों का पन्ना खोलते हैं, तो समझ आता है कि उंगली उठाने वाले के खुद के हाथ टैक्स की वसूली से सने हुए हैं। वैश्विक संकट अपनी जगह है, लेकिन राज्यों को मिलने वाले टैक्स के अधिकार का इस्तेमाल जनता को लूटने के लिए नहीं, राहत देने के लिए होना चाहिए।”

“आपको क्या लगता है? क्या पंजाब सरकार को पेट्रोल-डीजल पर अपना वैट (VAT) और सेस कम करना चाहिए? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर लिखिए। वीडियो को लाइक कीजिए, दोस्तों के साथ शेयर कीजिए और चैनल को सब्सक्राइब करना मत भूलिएगा। मिलते हैं अगले वीडियो में, जय हिंद!”

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