Netflex और Bollywood के ‘नेक्सस’ का पर्दाफाश! क्रिएटिव फ्रीडम या सनातन का अपमान? | Sach Ki Raftar
आज मैं जो बोलने जा रहा हूँ, वो उन लोगों के कलेजे को छलनी कर देगा जो “क्रिएटिव फ्रीडम” के नाम पर अपनी संस्कृति का सौदा कर चुके हैं। अगर सच सुनना पसंद नहीं है, तो अभी वीडियो बंद कर दीजिए। लेकिन अर अपनी जड़ों के प्रति वफादार हैं, तो आज एक-एक शब्द को ध्यान से सुनिएगा। मामला सिर्फ एक वेब-सीरीज़ का नहीं है, मामला है हमारी पहचान और धर्म पर हो रहे सुनियोजित ‘डिजिटल हमले’ का!
ये नेटफ्लिक्स और बॉलीवुड का जो नया ‘नेक्सस’ (गठबंधन) बना है न, ये भारत के लिए किसी दीमक से कम नहीं है बॉलीवुड ने दशकों तक बड़े पर्दे पर हमारी संस्कृति का मज़ाक उड़ाया और अब नेटफ्लिक्स जैसे विदेशी प्लेटफॉर्म्स ने उन्हें वो ज़मीन दे दी है जहाँ कोई सेंसर नहीं, कोई मर्यादा नहीं।
इनका मकसद साफ़ है— पैसा कमाओ और भारत की आत्मा को लहूलुहान करो। बॉलीवुड के वो फिल्ममेकर्स जो कभी दाऊद के गुणगान गाते थे, आज वही लोग ओटीटी पर बैठकर हमारे संस्कारों को ‘पिछड़ा’ साबित करने की सुपारी ले चुके हैं।
अभी हाल ही में इन्होंने एक नया एजेंडा चलाया है— एक ‘घूसखोर पंडित’ की कहानी! वाह! मतलब क्या गजब की क्रिएटिविटी है आपकी? नेटफ्लिक्स और बॉलीवुड वालों, ज़रा ये बताओ— क्या तुम्हें भारत में सिर्फ भ्रष्टाचार ही दिखता है? क्या तुम्हें उन निस्वार्थ संतों की सेवा नहीं दिखती जो आज भी समाज को जोड़ रहे हैं? पंडित को घूसखोर दिखाना, पुजारी को लालची दिखाना और मंदिर को अपराध का अड्डा बनाना— ये तुम्हारा संयोग नहीं, ये तुम्हारा धंधा बन चुका है! हिम्मत है तो कभी दूसरे धर्मों की कुरीतियों पर कैमरा घुमाओ? नहीं करोगे… क्योंकि वहाँ तुम्हारी ‘क्रिएटिव फ्रीडम’ घुटने टेक देती है और डर के मारे पसीने छूटने लगते हैं। सिर्फ सनातन धर्म ही मिलता है क्या तुम्हें सॉफ्ट टारगेट के लिए?
ये लोग क्या कर रहे हैं? ये हमारे युवाओं के दिमाग में ज़हर भर रहे हैं। जब एक 15 साल का बच्चा बार-बार स्क्रीन पर अपने ही धर्म के पात्रों को भ्रष्ट और गंदा देखता है, तो वो अपनी संस्कृति से कटने लगता है। यही तो ये चाहते हैं! बॉलीवुड के सो-कॉल्ड ‘एलीट’ क्लास और नेटफ्लिक्स के डॉलर्स का एक ही मिशन है— भारत को मानसिक गुलाम बनाना। ये दिखाना चाहते हैं कि तुम्हारी परंपराएं सड़ी-गली हैं, तुम्हारे संस्कार बेकार हैं और ‘कूल’ बनने के लिए तुम्हें अपनी जड़ों को छोड़ना होगा। ये मनोरंजन नहीं है, ये ‘सांस्कृतिक आतंकवाद’ है!
सुन लो नेटफ्लिक्स वालों और बॉलीवुड के उन ‘एजेंडा-धारी’ डायरेक्टरों— तुम्हारा ये खेल अब और नहीं चलेगा। भारत की जनता अब जाग चुकी है। तुम सोचते हो कि तुम करोड़ों रुपये लगाकर हमें अपनी ही संस्कृति से नफरत करना सिखा दोगे? याद रखना, जिस डाल पर बैठे हो, उसी को काट रहे हो। अगर भारत का सनातन समाज नहीं होगा, तो तुम्हारी फिल्में और ये ओटीटी सब्सक्रिप्शन कौन खरीदेगा? हमारे ही पैसे से हमें ही गाली देने का दौर अब खत्म होने वाला है।
भाइयों और बहनों, अब वक्त आ गया है कि हम अपनी ताकत दिखाएं। ‘बहिष्कार’ !सिर्फ बोलने से कुछ नहीं होगा, ऐसी सीरीज़ और ऐसे प्लेटफॉर्म्स का सब्सक्रिप्शन लात मारकर खत्म कीजिए। सोशल मीडिया पर इन एक्टर्स और डायरेक्टर्स को टैग करके पूछिए कि आखिर क्यों हमेशा हिंदू धर्म ही इनके निशाने पर होता है?
जागरूकता: अपने बच्चों को बताइए कि ये स्क्रीन पर जो दिखाया जा रहा है, वो ‘सच’ नहीं बल्कि ‘ज़हर’ है।
भारत वह देश है जिसने दुनिया को सभ्यता सिखाई। हमारी संस्कृति को मिटाने की कोशिश मुगलों ने की, अंग्रेजों ने की… वो चले गए, लेकिन भारत आज भी अटल है। तो तुम जैसे कुछ ‘डिजिटल अपराधी’ हमारा क्या बिगाड़ लेंगे? अगर आप अपनी संस्कृति के सम्मान में मेरे साथ हैं, तो कमेंट में पूरे गर्व के साथ लिखिए— “हम अपनी संस्कृति का अपमान नहीं सहेंगे!” वीडियो को इतना शेयर करो कि इन प्लेटफॉर्म्स के ऑफिस तक गूंज सुनाई दे। जय हिन्द, जय भारत! 🇮🇳
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