PM Modi को गाली देना पड़ा भारी! 😱 ‘CJP’ की लड़की पर ठोकी ZERO FIR! 🔥 Ruchika Singh को जाना होगा जेल | Sach Ki Raftar
भाई साहब! दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट तो बहुत देखे थे, लेकिन ये “कॉकरोच जनता पार्टी” (CJP) का प्रोटेस्ट तो भाई… गज़ब ही निकल गया! मतलब, नाम सुन के लगा था कि शायद पेस्ट कंट्रोल के ख़िलाफ़ प्रोटेस्ट होगा… लेकिन नहीं! यहाँ तो मामला सीधे देश के पीएम तक पहुँच गया!
जी हाँ! खबर है कि इस प्रोटेस्ट के दौरान एक मोहतरमा, नाम है रुचिका सिंह (उम्र 25 साल, पर बातें एकदम रॉकेट साइंस वाली!), ने जोश-जोश में होश खो दिए. और होश ऐसे खोए कि सीधे प्रधानमंत्री मोदी के ख़िलाफ़ ही… (गले पर हाथ फेरते हुए) ‘अभद्र टिप्पणी’ कर डाली! मतलब, बहन जी को लगा होगा कि जंतर-मंतर है, कुछ भी बोल दो, कौन सुन रहा है? लेकिन! पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त! रुचिका जी ये भूल गईं कि कानून के हाथ लंबे हों न हों, वकीलों की नज़र बहुत तेज़ होती है!
एंट्री होती है गाजियाबाद की रहने वाली एडवोकेट स्मृति सिंह की! प्रोफेशन से वकील और दिल से… राजा भैया (जनसत्ता दल लोकतांत्रिक) की समर्थक! स्मृति जी ने जब रुचिका का वो वायरल वीडियो देखा, तो उनका खून खौल उठा! उन्होंने सोचा- “बेटा! अब तो तुझे ‘कोर्ट-कचहरी’ का स्वाद चखाना ही पड़ेगा!”
अब स्मृति जी रुकीं नहीं! वो सीधे दौड़ीं नोएडा के एक्सप्रेसवे थाने. और वहाँ जा कर करा दी… (सस्पेंस वाला साउंड) ‘जीरो एफआईआर’!
अरे भाई, अब ये मत पूछना कि जीरो एफआईआर क्या होती है? ये ऐसी जादुई एफआईआर है, जिसे आप किसी भी थाने में दर्ज करा सकते हैं, चाहे कांड अंडमान-निकोबार में हुआ हो! मतलब, पुलिस वाले ये नहीं कह सकते- “अरे ये तो हमारे इलाके का नहीं है!” तो भाई, मामला जंतर-मंतर का था, लेकिन रिपोर्ट लिखी गई नोएडा में! ज़ीरो बैलेंस की तरह, ज़ीरो एफआईआर!
अब सुनिए कि रुचिका जी पर कौन-कौन सी ‘भयंकर’ धाराएं लगी हैं! ये सब भारतीय न्याय संहिता (BANS) की धाराएं हैं, जो नए-नए पैकेज में आई हैं:
धारा 352: (व्यंग्य से) मतलब, आपने जानबूझकर किसी का ‘अपमान’ किया ताकि वो ‘शांति भंग’ कर दे! (सोचते हुए) भाई, पीएम का अपमान करके शांति भंग? वो तो वैसे भी ध्यान में रहते हैं!
धारा 353 (1): ‘सार्वजनिक नुकसान’ पहुँचाने वाली झूठी या भड़काऊ बातें फैलाना! (हंसते हुए) अब ये ‘सार्वजनिक नुकसान’ क्या है? किसी की भावनाएं आहत हो गईं या किसी ने अपना टीवी तोड़ दिया?
धारा 356 (1): ‘मानहानि’ यानी डिफेमेशन! मतलब, आपने किसी की इज़्ज़त उतारने की कोशिश की! भाई! 25 साल की उम्र में इतनी धाराएं! रुचिका जी को लगा होगा कि वो कोई ‘क्रांतिकारी’ काम कर रही हैं, लेकिन अब तो उन्हें शायद ‘थाने-कचहरी’ के ही चक्कर लगाने पड़ेंगे!
मज़े की बात सुनिए! सीजेपी का ये प्रोटेस्ट तो शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के साथ शुरू हुआ था, और उन्हीं के इस्तीफे (जो हुआ नहीं, वैसे) के बिना ही… खत्म हो गया! लेकिन अब बहस छिड़ गई है! लोग कह रहे हैं- “अरे भाई! प्रोटेस्ट करो, डंडे खाओ, नारे लगाओ, लेकिन गाली-गलौज क्यों?” कुछ लोग कह रहे हैं कि ये तो ‘अभिव्यक्ति की आज़ादी’ है! (व्यंग्यात्मक हंसी) हाँ भाई, आज़ादी है, लेकिन उतनी ही जितनी सामने वाले की नाज़ुक भावनाओं को ठेस न पहुँचे!
अब सबसे बड़ा सवाल! सीजेपी ने सरकार के सामने शर्त रखी थी कि प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कोई मुकदमा नहीं करेगी, और सरकार ने मान भी लिया था! तो क्या अब ये ‘शर्तों का कवच’ रुचिका जी को बचा पाएगा? क्या प्रधानमंत्री को गाली देना ‘प्रोटेस्ट’ का हिस्सा माना जाएगा? या फिर… रुचिका जी को ‘कानून के शिकंजे’ में कसना ही पड़ेगा?
खैर, जो भी हो, इस ड्रामे में आगे क्या होगा, ये तो वक्त ही बताएगा! लेकिन आपको क्या लगता है? क्या रुचिका ने सही किया या स्मृति सिंह की ‘जीरो एफआईआर’ सही है? कमेंट करके ज़रूर बताना! और हाँ, ऐसे ही ‘मज़ेदार’ और ‘आक्रामक’ वीडियो देखने के लिए चैनल को सब्सक्राइब करना मत भूलना! वरना… (हंसते हुए) आप पर भी कोई ‘जीरो एफआईआर’ कर सकता है! मिलते हैं अगले वीडियो में!
