Punjab में चल रही है Arvind Kejriwal और Manish Sisodia की मनमर्जी | उद्घाटन मंत्रालय | Sach Ki Raftar
पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार में अब एक नया मंत्रालय बना दिया गया है मंत्रालय का नाम है उद्घाटन मंत्रालय। इस उद्घाटन मंत्रालय की खासियत ये है कि इसका मंत्री बनने के लिए आपको चुनाव नहीं लड़ना पड़ता है आपको जनता चुनकर नहीं भेजती है यहाँ तक की आप चुनाव बुरी तरह हार चुके हो तो भी आपको इस मंत्रालय में पद मिल जाता है और अगर आप जेल काट चुके हो तो बस ये मान लो की ये मंत्रालय आप ही के लिए बना है। तो अब सवाल ये है कि इस मंत्रालय तक पहुंचे कैसे। इस मंत्रालय का मंत्री बनने की बस एक शर्त है कि आपका नाम अरविंद केजरीवाल होना चाहिए आपका नाम मनीष सिसोदिया होना चाहिए अगर आप इनमें से कोई एक हैं तो पंजाब सरकार में उद्घाटन मंत्री बन सकते हैं।
दरअसल दिल्ली के पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया इन दिनों पंजाब में पंजाब सरकार द्वारा करवाए गए निर्माण कार्यों का उद्घाटन कर रहे हैं सवाल यह है कि ना तो वह पंजाब सरकार में मंत्री हैं और ना ही विधायक तो फिर किस हैसियत से
सोदिया यह उद्घाटन कर रहे हैं। जवाब है उद्घाटन मंत्री की हैसियत से। मनीष सिसोदिया ने हाल के दिनों में नवा शहर के स्कूल ऑफ एमिनेंस का उद्घाटन किया उद्घाटन वाली शिलापट पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के नाम के नीचे मनीष सिसोदिया का नाम अंकित है सवाल वही कि सिसोदिया ना किसी संवैधानिक पद पर हैं और ना ही पंजाब सरकार में उनका कोई रोल है सिसोदिया को जो जिम्मेदारी दी गई है वह पार्टी की दी गई है वो पंजाब के प्रभारी बनाए गए हैं सरकार के नहीं यह फर्क आम आदमी पार्टी या पंजाब की सरकार शायद नहीं कर पा रही है और अगर कर भी पा रही है तो मान साहब चुप बैठे होंगे कि अभी तो उद्घाटन मंत्री ही बने हैं कुछ बोला तो कहीं इधर भी उप मुख्यमंत्री ना बन जाए। जबकि ये पूरी तरह से अपमान है उन सांसदों का उन विधायकों का जिनको पंजाब की जनता ने चुनकर जिताया है। उद्घाटन उनके हाथो होने की जगह एक ऐसे नेता से उद्घाटन करवाया जा रहा है जो खुद भर्ष्टाचार के आरोप में जेल से बैल पर बहार है जिसको उसके क्षेत्र की जनता ने बुरी तरह हराकर दिल्ली से बहार कर दिया है।
बहरहाल सिसोदिया चमकौर साहिब में एक प्लेग्राउंड के उद्घाटन समारोह में भी पहुंचते हैं वह पंजाब सरकार में मंत्री और विधायकों के साथ सरकार के कार्यों का जायजा लेने पहुंच रहे हैं। सवाल फिर वही है कि आखिर उनके पास क्या अधिकार है कि वह सरकार के कार्यों का जायजा लें। अब आम आदमी पार्टी से सहानुभूति रखने वाले लोग तर्क दे रहे हैं कि सिसोदिया क्योंकि पंजाब के प्रभारी हैं तो इस हैसियत से वह सरकार के कार्यों का उद्घाटन कर रहे हैं। इस पर पहला सवाल तो यह है कि जब इससे पहले तक पंजाब के प्रभारी जनरल सिंह थे तो फिर उन्होंने क्यों नहीं इस तरह के कोई उद्घाटन किए थे। क्या वह पार्टी के भीतर सिसोदिया जितने पावरफुल नहीं थे कि दूसरे राज्य की सरकार में दखल अंदाजी कर सकें।
दूसरा सवाल यह है कि पार्टी का प्रभारी होना और सरकार में प्रत्यक्ष रूप से दखल देना यह दोनों अलग-अलग बातें हैं उन्हें पार्टी की जिम्मेदारी दी गई है वह जमीन पर संगठन को मजबूत बनाने का काम कर सकते हैं पार्टी के नेताओं से मुलाकात कर सकते हैं मंथन कर सकते हैं पार्टी कार्यकर्ताओं से बातचीत कर सकते हैं चाहो तो रैली कर लो लेकिन सरकारी कामकाज में दखल क्यों दिया जा रहा है। इससे तो यही संदेश जाता है कि ना तो जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों का वह सम्मान करते हैं और संवैधानिक पद का भी नहीं करते हैं।
आप बस सरकार के पावर के सेंटर में रहना चाहते हैं इससे पहले हमने अरविंद केजरीवाल को यही करते हुए देखा था दिल्ली से बुरी तरह हारने के बाद विपक्ष सेना के नाम पर केजरीवाल पहले पंजाब में एंट्री करते हैं 10-12 दिन गायब रहते हैं और फिर हम उन्हें पंजाब में रैलियां करते हुए देखते हैं उद्घाटन करते हुए देखते हैं दिल्ली विधानसभा चुनाव हारने के बाद आखिर आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता जिन्हें हार की जिम्मेदारी लेते हुए दिल्ली में जमीन पर उतरना चाहिए था अपना कैडर मजबूत करना चाहिए था हार का मंथन करना चाहिए था वह जाकर पंजाब में बैठ गए हैं और उद्घाटन पर उद्घाटन कर रहे हैं कुल मिलाकर कहानी यह है कि अब यह मुख्यमंत्री उप मुख्यमंत्री या कोई और मंत्री तो बन नहीं पा रहे हैं वह हैसियत अब रही नहीं है तो फिर उद्घाटन मंत्री ही बन रहे हैं।
जिस तरह केजरीवाल एंड संस ने दिल्ली को 12 सालो में नर्क बना दिया है उसी तर्ज पर आज ये पंजाब को भी नर्क में धकेल रहे है। हमने आपको पहले भी बताया है की किस तरह पंजाब की महिलाओ को 1000 महीना देने के नाम पर बेवकूफ बनाया गया। कैसे पंजाब पुलिस में sex और ड्रग्स के स्कैंडल चल रहे है। कैसे एक आम आदमी जो बड़ी बड़ी बाते किया करता था वो आज सब भूल कर आम जनता के पैसे जो सरकार को tax के रूप में दिया जाता है उसका दुरपयोग करके सरकारी पैसे का भरपूर आनंद ले रहा है। क्या ऐसा व्यक्ति किसी भी सरकार में रहने लायक है। क्या ऐसा व्यक्ति किसी राज्य का विकास कर सकता है ये आपको सोचना है।
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